स्वास्थ्य

डॉक्टर की सलाह के बिना पैरासीटामॉल लेने से हो सकती हैं ये बीमारियां

सिर में मामूली सा दर्द हुआ नहीं कि रीमा ने पैरासीटामॉल की गोली गटक ली। रीमा हीं नहीं बल्कि रीमा की तरह बहुत से लोग ऐसा हीं करते हैं। लोगों को सेल्फ मेडिकेशन एक आसान, सस्ता और कम समय में होने वाला उपाय लगता है। लेकिन कम समय में मिलने वाली राहत जल्द ही स्थायी आदत में तब्दील हो जाती है और शरीर कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। माना कि पैरासीटामॉल एक ऐसी दर्दनिवारक दवा है जिसे दर्द होने पर समान्य लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाएं भी आसानी से ले लेती है। और अधिक नुक्सानदेह ना होने कारण भारतीय मेडीकल दुकानों पर यह दवा बिना डॉक्टर की स्लिप आसानी से ली जा सकती हैं। लेकिन डॉक्टरी सलाह के बिना मामूली बुखार से परेशान होने पर भी आप पैरासीटामॉल की गोली ले लेते हैं और ऐसा आप कई सालों से करते आ रहे हैं, तो सावधान हो जाये। क्योंकि हर बार मामूली से दर्द या बुखार में पैरासीटामॉल लेना फायदे से ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। इसके अधिक इस्तेमाल से शरीर के कई अंगों को नुकसान हो सकता है। आइए जानें बिना डॉक्टर की सलाह के बिना पैरासीटामॉल लेना शरीर के लिए कैसे नुकसानदेह होता है। क्या आपने कभी भी दवा के पैकेट पर लिखा देखा हैं कि ज्यादा मात्रा में पैरासीटामॉल लेना लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। जीं हां डॉक्टरों का कहना है कि एक व्यक्ति को एक दिन में 3 ग्राम से ज्यादा पैरासीटामॉल नहीं लेनी चाहिए और अगर किसी कारणवश लेनी भी पड़े तो पहले अपने डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।

गर्भवती और बच्चों के लिए नुकसानदेह: आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि गर्भवती के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली पैरासीटामॉल अगर बिना जांच के गर्भवती को दी जाती है तो सुरक्षित समझे जाने वाली पैरासीटामॉल की गोली गर्भ में पल रहे बच्चे के पूर्ण विकास में रुकवाट पैदा कर सकती है। नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार गर्भवती को बिना डॉक्टरी सलाह के पैरासीटामॉल नही लेनी चाहिए।

किडनी पर असर: दर्द निवारक दवा के रूप में पैरासीटामॉल का लंबे समय तक सेवन करना बहुत हानिकारक है। बिना डॉक्टरी सलाह के पीठ दर्द के लिए इसे लेने पर यह लाभ के बजाए नुकसान पहुंचाती है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के शोधकर्ताओं के अनुसार आस्टियोआर्थराइटिस एवं पीठ दर्द को कम करने के लिए लोग पैरासीटामॉल का इस्तेमाल आसानी से करते हैं, पर इसका किडनी पर असर पड़ता है।

अस्थमा की समस्या: हल्का सा बुखार होने पर ही हम अपने बच्चे को पैरासीटामॉल देने लगते हैं। लेकिन कई शोधों से ये बात साबित हुई है कि 6-7 साल की उम्र में बच्चों को पैरासीटामॉल देने से उनके शरीर में अस्थमा के लक्ष्णों को बढ़ावा मिलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि बच्चों को 101.3 एस्न बुखार होने पर ही पैरासीटामॉल देनी चाहिए।

पेट में गैस की समस्या और त्वचा पर एलर्जी : कई मामलों में तो पैरासीटामॉल का अधिक सेवन पेट में गैस की समस्या पैदा कर सकता है। तो अगर आप अपच या पेट में भारीपन से परेशान हैं तो हो सकता है कि ऐसा पैरासीटामॉल के सेवन से हो रहा हो। इसके अलावा कुछ लोगों को पैरासीटामॉल के अधिक सेवन करने से त्वचा पर लाल चकत्ते और एलर्जी हो जाती है, जिसमें खुजली या जलन भी होती है।

लीवर को नुकसान: अगर आप पीलिया या लीवर संबंधी किसी समस्या से पीडि़त हैं, तो डॉक्टर की सलाह लिए बिना पैरासीटामॉल खाने से लीवर डैमेज हो सकता है। कई मामलों में लीवर फेलियर के भी चांस होते हैं। इसलिए दवा को लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
सुस्ती महसूस होना: इसके अलावा कई बार पैरासीटामॉल लेने के बाद बहुत ज्यादा सुस्ती महसूस होती है। तो ऐसे में डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

Related Articles

Back to top button
Close