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बदले जाएंगे उम्र पूरी कर चुके मेट्रो ट्रैक पर लगे प्वाइंट मशीन 

नई दिल्ली
मेट्रो ट्रैक पर परिचालन के दौरान सिग्नलिंग के जरिए मेट्रो ट्रेन को ट्रैक बदलने की अनुमति देने वाले इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण प्वाइंट मशीन बदले जाएंगे। प्वाइंट मशीन अपनी उम्र से ज्यादा चल या पूरी करने वाल है। मेट्रो ने सुरक्षित सफर के लिए इसके बदलने या मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए जर्मनी से आई टीम ने अपने साथ खास कंटेनर लाया है जिससे इसके मरम्मत का काम जल्द बेहतर तरीके से हो पाएगा। इस तकनीकी से इसके लागत को 80 फीसदी तक काम किया जा सकेगा। मेट्रो के मुताबिक पहले चरण में ब्लू लाइन (नोएडा/वैशाली से द्वारका-21) और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन (नई दिल्ली से द्वारका-21 ) के बीच चलने वाली लाइन पर किया जाएगा। ब्लू लाइन पर करीब 260 प्वाइंट मशीन है जिसकी जांच कर जहां मरम्मत की जरूरत होगी उसकी मरम्मत होगी जहां बदलने की जरूरत होगी उसे बदला जाएगा। इसी तरह एयरपोर्ट लाइन पर भी 150 से अधिक प्वाइंट मशीन लगे हुए है। मरम्मत के लिए फिलहाल यमुना बैंक डिपो पर खास कंटेनर का सेटअप किया गया है। चूकि सिर्फ रात में परिचालन के बाद ही प्वाइंट मशीन के जांच का समय मिलता है इसलिए यह काम मार्च 2022 तक पूरा होगा। 

क्या होता है प्वाइंट मशीन
प्वाइंट मशीन एक इलेक्ट्रो मैकेनिकल उपकरण है। सिग्नलिंग सिस्टम के साथ जुड़ा यह उपकरण मेट्रो परिचालन में सबसे अहम भूमिका है। यही प्वाइंट मशीन ट्रैक पर मेट्रो ट्रेन को एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाने की अनुमति देता है। इसकी अनुमति के बगैर ट्रेन अपना ट्रैक नहीं बदल सकते है। इसका उम्र 10 साल या 10 लाख बार ट्रे्नों के परिचालन के बराबर होता है। यह सुरक्षित ट्रेन संचालन को सुनिश्चित करता है। 

कैसे काम करता है जर्मनी से आया कंटेनर
प्वाइंट मशीन के जांच व मरम्मत के लिए जर्मीन से सीमेंस पोर्टेबल कंटेनर सभी जरूरी उपकरणों से सुसज्जित है। कंटेनर को आंतरिक रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। पहले भाग में आवश्यक मशीनें, उपकरण और दस्तावेज होते हैं और दूसरा भाग कंटेनर का सबसे मुख्य भाग है जिसमें एक प्वाइंट मशीन टेस्ट बेंच होता है। जहां पर बिजली की आपूर्ति, रैखिक ड्राइव, डिजिटल मीटर, मोटर परीक्षण आदि की सुविधा होती है। यह कंटेनर एक दिन में तीन प्वाइंट मशीनों को ओवरहाल कर सकता है। जर्मनी से आई टीम ब्लू लाइन के प्वाइंट मशीनों की मरम्मत के साथ डीएमआरसी टीम को प्रशिक्षण भी दे रही है जिससे भविष्य में मेट्रो यह काम खुद कर सके। 
 

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