मध्य प्रदेश

उच्च शिक्षा विभाग: 1225 विद्यार्थियों ने निरस्त कराए एडमिशन

भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग के स्नातक में प्रवेश के लिए निजी और सरकारी 1301 कॉलेजों में प्रथम चरण की काउंसलिंग में 1225 विद्यार्थियों ने अपने प्रवेश निरस्त करा लिए हैं। यूजी-पीजी के दोनों राउंड की काउंसलिंग में सबसे ज्यादा प्रवेश प्रथम राउंड की काउंसलिंग में निरस्त हुए हैं। अब विद्यार्थी कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) से प्रवेश लेने के लिए कवायद कर रहे हैं। प्रदेश के सभी कॉलेजों में यूजी-पीजी में करीब 12 लाख सीटें हैं, जिसमें अंतिम तौर की सीएलसी हो रही है।

उच्च शिक्षा विभाग ने सीएलसी शुरू कर दी है। दोनों राउंड में सीट छोड़ने वाले विद्यार्थी और प्रवेश को निरस्त कराने विद्यार्थी अब सीएलसी के भरोसे हैं। प्रवेश निरस्त होने के बाद उनका पंजीयन यथावत है, इसलिए वे अब अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश लेने भागीदारी करेंगे। वहीं, दूसरी तरफ विभाग प्रवेश निरस्त कराने वाले विद्यार्थियों की जानकारी एकत्रित करने में लगा हुआ है, ताकि उन्हें भी विद्यार्थियों द्वारा प्रवेश निरस्त कराने के कारणों की पता चल सके।

यहां तक विभाग उनकी समस्याओं को दूर कर सीएलसी से प्रवेश की संख्या में इजाफा कर सकेगा। इसमें सबसे ज्यादा परेशान करने वाले पांच कारण सामने आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा विद्यार्थियों के पास फीस का शुल्क नहीं होना, अपनी तरफ से सही च्वॉइस नहीं देना, कॉलेजों की पूर्ण जानकारी नहीं होना शामिल हैं। प्रवेश लेने के बाद  कॉलेज विद्यार्थियों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं, जिसके कारण प्रवेश निरस्त कराए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा राजधानी के कॉलेज शामिल हैं और दूसरे नंबर पर इंदौर के कॉलेज हैं।

कल पीजी के सीएलसी के पंजीयन पर विराम लग गया है। इसमें करीब साढ़े 23 हजार पंजीयन हुए हैं। जबकि यूजी के पंजीयन पर कल विराम लगेगा। अभी तक यूजी में 30 हजार विद्यार्थियोंं ने अपना पंजीयन कराया। इनमें सवा 15 हजार विद्यार्थियों के आवेदनों को सत्यापित किया गया। पीजी में 13 हजार आवेदनों का सत्यापन किया गया है। वहीं, एनसीईटी के आठ कोर्स में 853 कॉलेजों में एडमिशन के लिए कुल बीस हजार नए विद्यार्थियों के पंजीयन हुए। 25 सितंबर को उनकी सीटों का आवंटन किया जाएगा।

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