मध्य प्रदेश

नहीं चलेगी लेटलतीफी, सरकार ने जारी किए निर्देश, मिलेगी डीम्ड अनुमति

भोपाल
प्रदेश में अब जमीनों के डायवर्जन में एसडीएम की मनमर्जी नहीं चलेगी। भूमिस्वामी द्वारा आवेदन दिए जाने के पंद्रह दिन के भीतर कार्यवाही नहीं की तो डीम्ड डायवर्जन कराया जाएगा। इसके लिए राज्य शासन ने सभी कलेक्टर और कमिश्नरों को निर्देश जारी कर दिए है।

मध्यप्रदेश में अभी तक डायवर्जन के लिए तीस दिन का समय निर्धारित था। लेकिन अक्सर इस अवधि में भी आमजन के काम नहीं हो रहे थे और उन्हें डायवर्जन के लिए परेशान होना पड़ रहा था। अनुविभागीय दंडाधिकारी,एसडीएम आवेदनों में मीन-मेख निकालकर लोगों की जमीनों का समय पर डायवर्जन नहीं कर रहे थे। कभी जमीन के आकार में भिन्नता बताकर तो कभी शुल्क कम जमा होना बताकर डायवर्जन नहीं किया जा रहा था। कभी भौतिक सत्यापन नहीं होने, पटवारी और राजस्व निरीक्षकों की कमी का बहाना लेते हुए डायवर्जन में लेटलतीफी की जाती थी। आम जन की शिकायत यह भी थी कि डायवर्जन में देरी कर निचला अमला अक्सर इस काम के एवज में अवैधानिक मांग करता है जिसके बिना काम समय पर नहीं हो पाता है। अब इस सबसे आमजन को निजात मिल सकेगी।

डायवर्जन के लिए आमजनता द्वारा निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन दिए जाने के बाद भू अभिलेख पोर्टल पर उसकी स्वत: एंट्री हो जाएगी। इसमें खसरे प्रारूप की जानकारी के साथ ही उसके डायवर्जन के स्वरूप की जानकारी अंकित हो जाएगी। आवेदक के आवेदन में यदि शुल्क कम जमा हुआ है तो उसका पुनर्निर्धारण करने के लिए एसडीएम को पंद्रह दिन के भीतर ही आवेदक को नोटिस जारी करना होगा। इसकी जानकारी आयुक्त भू अभिलेख को भी देना होगा। यदि एसडीएम द्वारा डायवर्जन की सूचना की पुष्टि करने के लिए निर्धारित अवधि में पुनर्निर्धारण कर मांग का नोटिस जारी नहीं किया जाता है सोलहवे दिन डीम्ड डायवर्जन किया हुआ माना जाएगा।

 यह डायवर्जन आवेदक द्वारा चाही गई भूमि पर जमा आवेदन शुल्क के अनुसार किया जाएगा। यदि एसडीएम द्वारा पंद्रह दिन के भीतर शुल्क कम जमा होने पर आवेदक को नोटिस जारी कर दिया जाता है तो आवेदक को अंतर की राशि का भुगतान करने के बाद ही खसरे में डायवर्जन दर्ज किया जाएगा।

आवेदक के आवेदन पर पंद्रह दिन में कोई स्वीकृति नहीं दिए जाने पर या कम शुल्क की वसूली का नोटिस जारी नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में यह माना जाएगा कि आवेदक के खसरे में चाहे गए अनुसार डायवर्जन पर एसडीएम को कोई आपत्ति नहीं है और डायवर्जन करते हुए अनुमति जारी करना होगा। यदि आकार परिवर्तन या शुल्क में कमी के लिए पंद्रह दिन से पहले एसडीएम द्वारा नोटिस जारी कर दिया जाता है और आवेदक द्वारा मांगा गया शुल्क जमा कर दिया जाता है तो आवेदक की जमीन में खसरे प्में उल्लेख करते हुए डायवर्जन दर्ज कर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

सारी प्रक्रिया सही होने के बाद भी मैपिंग में त्रुटि के कारण डायवर्जन की राशि की गणना में त्रुटि होती है तो अंतर की राशि जमा करने के लिए आवश्यक नोटिस एसडीएम जारी करेगा और राशि जमा होने पर प्रकरण का निराकरण किया जाएगा। मैपिंग में त्रुटि होने पर आवेदक के साथ साथ एसडीएम को आयुक्त भू अभिलेख कार्यालय को भी इसकी जानकारी देना होगा ताकि मैपिंग में सुधार किया जा सके।

 

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