छत्तीसगढ़

साहित्य के साथ राजनीति के सुंदर समन्वयक थे बलदेव प्रसाद मिश्र-महापौर

राजनांदगांव
राष्ट्रीय कवि संगम राजनांदगांव एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति राजनांदगांव द्वारा आयोजित राम काव्य स्पर्धा में स्वामी विवेकानंद द्वारा अमेरिका के शिकागो शहर में दिए गये भारतीय संस्कृति से संबंधित विश्व चर्चित संभाषण की 128 वीं वर्षगांठ व संस्कारधानी नगरी के मधून्य साहित्यकार मानस मर्मज्ञ पं. बल्देव प्रसाद मिश्र को याद करते हुए कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती हेमा देषशमुख ने उपरोक्त मुर्धन्यो को याद करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने शिकागो के विश्व चर्चित भाषण से न केवल भारत की धर्म ध्वजा लहराई अपितु अंग्रेजो के जुल्मो-दमन का शिकार कार हो रहे भारतीयो में जोश व जज्बे का संचार किया । उन्होने बल्देव प्रसाद मिश्र को कृतज्ञता पूर्वक याद करते हुए कहा कि तुलसी दर्शन के प्रणेता साकेत संत कहे जाने वाले पं. मिश्र जी मानस मर्मज्ञ होने के साथ – साथ उच्च कोटि के साहित्यकार थे ।

उन्होने कहा कि साहित्य व राजनीतिक के सुन्दर समन्वयक पंडित जी ने केवल राजनांदगांव नगर पालिका , रायगढ़ , रायपुर सहित चांपा नगर पालिका के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया । ऐसे साहित्यकार मनीषियों के जन्म दिन मनाने व प्रेरणादायक प्रसंगो पर उन्हें याद किये जाने के लिए आयोजन समिति को उन्होने हार्दिक बधाई व शुभकामनाए दी । विषेश अतिथि के रूप मे उपस्थित राजगामी संपदा ट्रस्ट के अध्यक्ष विवेक वासनिक ने इस तरह के कला साहित्य उत्प्रेरक आयोजन की भूरि भूरि सराहना करते हुए कहा कि भारत देश को महात्मा गांधी के सपनो का भारत बनाना है तो हमें हमारे इन महापुरुषों को याद करना होगा। उन्होने तालिबानियों द्वारा बमियान में तोड़े गये बुद्ध की प्रतिमा की तरफ कट्टरता से बचने की बात कही । विशिष्ट अतिथि समाज सेवी शारदा तिवारी ने बताया की पं. बल्देव प्रसाद मिश्र जी ने केवल मानस मर्मज्ञ थे बल्कि उन्होंने यहां राम लीला भी खेली है जिसमें वे स्वयं राम बनते थे वही उनके भाई जगन्नाथ जी सीता व डा सुरूचि मिश्रा के दादा जी हनुमान व उनके स्वयं के दादा जी हष्ट- पुष्ट होने के कारण रावण बनते थे । ऐसे मर्धून्य जनो को राम काव्य स्पर्धा में याद किया जाना बहुत प्रशंसनीय पहल है  । विशेष अतिथि अशोक चौधरी व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य सरोज द्विवेदी ने पं. मिश्र जी को संस्कार पुरूष बताया तथा कहा कि वे ही एक ऐसे साहित्यकार है जो राजनांदगांव की पुण्य धरा पर जन्म लिया जिसकी विद्धता पूर्ण कीर्ति चहु दिशा फैली थी । उनकी विद्धता के कारण देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद जी उन्हे राजभवन में बुलाकर उन्हे राजभवन में बुलाकर उनसे रामायण की कथा सुनाते थे । साहित्य कला व संस्कृति के मूर्धन्य विद्वान बल्देव प्रसाद मिश्र पर राजनांदगांव वासियो को गर्व हैं ।

इस अवसर पर दिग्विजय कालेज के प्रोफेसर शंकर मुनिराय ने स्वामी विवेकानंद पर कमला कालेज के प्रो. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने बल्देव प्रसाद मिश्र पर व खैरागढ़ इंदिराकला विश्वविद्यालय से पधारे प्रो. राजन यदु ने साहित्य संस्कृति व रामकाव्य पर सारगर्भित उद्बोधन दिया । राम काव्य कथा के निर्णायक कवि साहित्यकार एवं लोक संगीत कार आत्माराम कोषा अमात्य प्रो. शंकर मुनिराय व कवि / उद्घोशक गजेन्द्र हरिहारनो (डोंगरगांव) थे । प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत प्रतियोगिता के संरक्षक आत्मा राम कोशा अमात्य, जिला प्रतियोगिता संयोजक ओमप्रकाश साहू अंकुर,राष्ट्रीय कवि संगम के जिलाध्यक्ष शैलेष गुप्ता, जिला सचिव तारीक लालानी साहिल, प्रांतीय सह संगठन मंत्री भावेश देशमुख, गिरीश ठक्कर, अनुराग सक्सेना, अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, चन्द्रशेखर शर्मा, रोशन साहू, नंद किशोर साव नीरव, युनुस अजनबी, ग्वाला प्रसाद यादव नटखट, पद्मा साहू ने किया।

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