छत्तीसगढ़

17 अगस्त तक जिले में धारा 144 लागू

रायगढ़
कोविड-19 एक संक्रामक बीमारी है, स्वास्थ्य की दृष्टि से यह निर्देश है कि कोविड-19 से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क से दूर रहें तथा ऐसे व्यक्ति जो संक्रमित है या संक्रमित होने की शंका है उन्हें संगरोध में रखा जावे।

रायगढ़ जिले में इस बीमारी के फैलने या संक्रमण होने की संभावना है। रायगढ़ जिले के सीमाओं से लगे हुए अन्य जिलों में यह बीमारी संक्रामक है। रायगढ़ जिला खनन क्षेत्र तथा औद्योगिक क्षेत्र होने के साथ-साथ जिले की सीमा अन्य प्रदेशों से जुड़े होने के कारण जिले में लगातार आवागमन एवं परिवहन होता है। तत्संबंध में राज्य शासन एवं जिला स्तर से उक्त संक्रमण के रोकथाम, नियंत्रण तथा निर्मित विकट स्थिति से निपटने के संबंध में आदेश, दिशा-निर्देश एवं एडवायजरी जारी किये गये हैं। इसी तारतम्य में केन्द्र शासन द्वारा कोविड-19 को महामारी घोषित किया गया है।

कलेक्टर श्री यशवंत कुमार ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेशित किया है कि यदि किसी व्यक्ति को लेकर पर्याप्त कारण, जानकारी या आवश्यकता है यह मानने के लिए कि वह (कोविड-19) से संक्रमित है या वह किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में है जो (कोविड-19) से संक्रमित हो सकता है या है, यह अनिवार्य होगा कि ऐसा व्यक्ति तुरंत सहयोग करके सारी जानकारी घोषित करेगा एवं सभी संभावित सहयोग निगरानी दल को देगा एवं उनके द्वारा दिये गये निर्देश (मौखिक या लिखित) जो कि निगरानी जांच निरीक्षण, भौतिक परीक्षण संगरोध और इलाज से संबंधित है और ऐसे व्यक्ति से संपर्क में आये हुए अन्य व्यक्ति पर भी लागू होगा, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो निवारण या इलाज के इन उपयोग या सहयोग देने से मना करता है अथवा संबंधित जानकारी देने से मना करता है या निगरानी दल के निदेर्शों का पालन नहीं करता है तो वह दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 की अवहेलना करने के लिए भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा 270 के तहत दण्ड का भागी होगा।

ऐसे जगहों के सभी मालिक, प्रबंधक, निवासरत सभी व्यक्तियों पर यह बाध्यता होगी कि वे ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आये जिनसे कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका है या कोविड-19 से संक्रमित देशों से आये है इस हेतु राज्य शासन द्वारा जारी दूरभाष टोल फ्री नं. 104 से संपर्क करके जिला चिकित्सालय एवं रेल्वे स्टेशन रायगढ़ में हेल्प डेस्क के बारे में जानकारी देंगे और वे बाध्य होंगे कि वे तुरंत सहयोग देकर ऐसे व्यक्तियों तक पहुंचने के लिए अप्रतिबंधित और आवश्यक सारी जानकारी का खुलासा करेंगे और सहायता देंगे जो निर्धारित स्वास्थ्य दल, जांच दल को अपना कार्य करने के लिए आवश्यक होगा। इन दलों के द्वारा दिये गये निदेर्शों (लिखित या मौखिक) का पालन करेंगे जो निगरानी जांच एवं भौतिक परीक्षण संगरोध और इलाज के लिए आवश्यक होगा। ऐसे किसी परिसर के अस्थायी बंद, मुद्रण, निकासी, धुमन, सफाई इत्यादि के लिए दिये गये आदेशों का पालन करेंगे एवं सहयोग प्रदान करेंगे। यदि उपरोक्त में से किसी का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा 270 के तहत दण्ड का भागी होगा।

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