स्वास्थ्य

स्किन को हेल्दी बनाने के अलावा स्ट्रेच मार्क्स भी दूर करता है कॉफी का यह मास्क

लड़कियों और महिलाओं में स्ट्रेच मार्क्स की समस्या काफी कॉमन है। ये मार्क्स स्किन के फैलने या सिकुड़ने की वजह से होते हैं। मोटे व्यक्ति की स्किन काफी फैल जाती है, लेकिन जब वही व्यक्ति वजन कम कर लेता है और पतला हो जाता है तो स्किन लूज हो जाती है जो स्ट्रेच मार्क्स का रूप ले लेती है।

स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने के लिए वैसे तो कई नैचरल तरीके अपनाए जाते हैं, जैसे कि एलोवेरा, नींबू और नारियल का तेल। लेकिन आज हम आपको कॉफी के एक ऐसे पैक के बारे में बताने जा रहे हैं जो स्ट्रेच मार्क्स को तो जड़ से मिटा ही देता है, साथ ही स्किन को भी हेल्दी बनाने में मदद करता है।

कॉफी मास्क बनाने का तरीका
इसके लिए 4 चम्मच कॉफी पाउडर लें और उसमें 5-6 चम्मच या आधा कप नारियल का तेल मिलाएं। 1 कप ब्राउन शुगर भी लें और सभी चीजों को मिक्स कर लें। चाहे तो इसमें नैचरल एलोवेरा को भी पीसकर मिक्स कर सकती हैं। अब इस मास्क को चेहरे के साथ-साथ स्ट्रेच मार्क्स वाले हिस्सों पर लगाएं। आधा घंटे तक ऐसे ही छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी की कुछ बूंदें हाथ में लेकर चेहरे पर स्ट्रेच मार्क्स वाले हिस्से की अच्छी तरह मसाज करें।

इसके बाद गुनगुने पानी से साफ कर लें और फिर मॉइश्चराइजर लगा लें। हफ्ते में कम से कम 2 दिन इस मास्क को लगाने से स्ट्रेच मार्क्स कुछ महीनों में गायब हो जाएंगे और स्किन भी चंद हफ्तों में हेल्दी और ग्लोइंग दिखने लगेगी।

 

कॉफी के स्किन के लिए फायदे
1- कॉफी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने में इसलिए मदद करता है क्योंकि यह एक बेहतरीन एक्सफोलिएटर है। इसमें कैफिक ऐसिड (caffeic acid) नाम का एक ऐंटी-ऑक्सिडेंट होता है जो स्किन में कोलेजन लेवल को बढ़ाता है, जिसे प्रीमच्योर एजिंग (असमय बूढ़ा होना) पर लगाम लगाता है।

2- इसमें ऐंटी-बैक्टीरियल और ऐंटी-माइक्रोबियल प्रॉपर्टीज भी होती हैं जो स्किन को हर तरह की गंदगी से बचाने में मदद करती हैं।

3- इसके अलावा आंखों के आसपास अगर सूजन आ जाए और उनमें दर्द हो तो भी कॉफी मदद करती है। इसमें मौजूद क्लोरोजेनिक ऐसिड (chlorogenic acid) आंखों के आसपास की सूजन और जलन को कम करने में मदद करता है।

4- कॉफी एक सनस्क्रीन का काम भी करती है और सूरज की पराबैंगनी किरणों से स्किन का बचाव करती है क्योंकि इसमें पॉलिफिनॉल्स नाम के ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स होते हैं, जिन्हें यूवी किरणों के प्रति एक सुरक्षा कवच के तौर पर जाना जाता है।

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