मध्य प्रदेश

सरकारी दफ्तरों को मिलेगी सस्ती बिजली

भोपाल
अब कमलनाथ सरकार ने बिजली की खपत कम करने के लिए ऐसी योजना बनाई है, जिसमें सरकारी दफ्तरों को सस्ती दरों पर सोलर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए इन दफ्तरों की छत पर निजी कंपनियां बिना किसी सरकारी अनुदान के सोलर प्लांट लगाएगी और प्लांट की जगह के बदले 25 साल तक सस्ते में उन्हें बिजली देगी। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के अफसरों क अनुसार निगम रेस्को मॉडल के तहत पूरे प्रदेश के हर जिले जिला मुख्यालय पर बने शासकीय भवनों की जानकारी तैयार कर रहा है। इनमें कंपनियां सोलर प्लांट लगाएंगी और सरकारी दफ्तों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराएंगी। निगम का अनुमान है कि निजी कंपनियां 2 से 3 रुपए प्रति यूनिट पर सरकारी दफ्तरों को बिजली उपलब्ध कराएंगी। प्रत्येक सरकारी कार्यालय का जिला स्तर पर बिजली कंपनियों से अनुबंध किया जाएगा। वे पैनल लगाने के साथ ही कनेक्शन देने के लिए मीटर भी लगाएंगी। बिजली कंपनी की तर्ज पर ही सोलर पैनल लगाने वाली कंपनियों बिजली बिल की हर माह वसूली करेगी।

जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रदेश के मात्र दस फीसदी सरकारी दफ्तरों के भवनों में सोलर टाइट लगाई गई है। इन भवनों में सोलर लाइट सरकार की अनुदान राशि पर लगाई गई है, इसके लिए सरकार ने 45 प्रतिशत अनुदान दिया है। सरकार ने अब घरों की छत पर सोलर लाइट लगाने के लिए अनुदान देना पूरी तरह से बंद कर दिया है। अब बिना किसी अनुदान के कंपनियों से शून्य निवेश पर रेस्को मॉडल से सोलर लाइट लगाने के योजना तैयार की गई है।

सरकारी दफ्तरों के भवनों पर पावर ग्रिड लगाए जाएंगे। यहां सोलर पैनल लगाने वाली कंपनियां 25 साल तक बिजली बिल वसूली के अलावा उसके रख-रखाव का भी काम करेगी।

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