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शराब बेच मजदूरों का पेट भर रहे ट्रांसजेंडर

पुणे
कोरोना वायरस ने प्रवासी मजदूरों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में हर कोई अपने तरीके से दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहा है। पुणे में वारजे-मालवाड़ी का ट्रांसजेंडर समुदाय भूखे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए आगे आया है। ऐसे कठिन समय में जब लोग दया का भाव खो रहें हैं, इस समुदाय ने अपनी कमाई में से कुछ हिस्सा लेने का फैसला किया ताकि वे पुणे में फंसे प्रवासियों को खाना खिला सकें।

दरअसल जो इस समय जो पैसा प्रवासी मजदूरों के लिए खाना बांटने में इस्तेमाल हो रहा है, यह पैसा शराब की बिक्री से हासिल किया गया। गोकुल पथार की पहाड़ी पर रहने वाले समुदाय के पास शराब की कुछ बोतलों का स्टॉक था, जिसे उन्होंने केवल तभी बाहर निकाला जब उनके संरक्षक उससे कमाई होने वाली रकम को दान देने के लिए सहमत हुए। जिसका बाद में खाना तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया।

भूख का दर्द जानते हैं
वारजे में ट्रांसजेंडर ग्रुप के 'गुरु' दीपा भोसले ने कहा 'हम सभी आर्थिक रूप से गरीब तबके से आते हैं और इसलिए, हम जानते हैं कि जब खाने के लिए पैसे नहीं होते तो कैसा महसूस होता है। चूंकि हम इन फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के दर्द को महसूस कर सकते हैं, इसलिए हमने इनकी मदद के रूप में इन्हें खाना खिलाने का जिम्मा उठाने का फैसला किया।'

शराब देने के लिए रखी ये शर्त
दीपा ने बताया कि हमारे पास शराब का भंडार था। लॉकडाउन के दौरान शराब के आदी लोगों ने कुछ बोतलों के लिए हमसे संपर्क किया। तभी हमने शराब बेचकर पैसे जुटाने की सोची। कोई भी व्यक्ति जो शराब के लिए हमारे पास आता था, हम उससे कहते थ कि शराब एक शर्त पर मिलेगी जब वह दान के लिए अतिरिक्त पैसे का देगा। दीपा ने कहा कि हमने 23,000 रुपये जुटाने में कामयाबी हासिल की, जिससे हमने राशन खरीदा।

300 लोगों को खिला रहे खाना
राशन खरीदने के बाद उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े को रसोई में बदल दिया, जहाँ वे हर दिन भोजन तैयार करने लगे। उन्होंने हर दिन 250-300 लोगों को खिलाने की जिम्मेदारी उठाई। ग्रुप के एक अन्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति शनाया भोसलेल ने कहा हमने पहले कभी ऐसा नहीं किया था। हालांकि,जब हम खाना तैयार करते हैं और जरूरतमंद लोगों में बांटेते हैं, जिस पर वे हमें आशीर्वाद देते हैं। हम उनके प्रति उनके दृष्टिकोण में बदलाव देख रहे हैं।

पुलिस विभाग ने की तारीफ
पुलिस विभाग ने समुदाय के काम की सराहना की है। वारजे-मालवाड़ी पुलिस स्टेशन के प्रभारी वरिष्ठ निरीक्षक अशोक कदम ने कहा कि वारजे के पास लगभग 1500 फंसे हुए प्रवासी हैं और ट्रांसजेंडर समुदाय सहित कई संगठनों ने उनकी जिम्मेदारी ली है। उन्होंन कहा 'मुझे उम्मीद है कि शहर में सामान्य स्थिति होने के बाद भी लोग उन्हें याद रखेंगे'।

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