छत्तीसगढ़

वाट्सऐप पर वायरल ‘जादुई महुआ’ से टेंशन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

पिपरिया
मध्य प्रदेश के पचमढ़ी (Pachmarhi) के पास सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) के बीचोंबीच श्रद्धालुओं का मेला उमड़ रहा है. टाइगर रिजर्व के संरक्षित क्षेत्र (Tiger Buffer Zone) में यह बाघ देखने (Tiger Sighting) या जंगली जानवरों के लिए नहीं, बल्कि खास हो चुके एक बेहद आम महुआ के पेड़ (Mahua Tree) के लिए है. इलाके में यह अफवाह फैल गई है कि इस महुआ को छुने से सभी बीमारियां तुरंत ठीक हो जाती हैं. यह अफवाह फैली है वाट्सऐप के एक वायरल मैसेज (WhatsApp Message gone Viral) से.

हालत ये है कि यहां पूरे राज्य से हर रोज 10 हजार से भी ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं. बुधवार और रविवार के दिन श्रृद्धालुओं की संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है. टाइगर रिजर्व के अंदर अचानक इतनी भीड़ ने स्थानीय प्रशासन की नींद हराम कर दी है. आने वाले तरह तरह की बीमारियों से ठीक होने की प्रार्थना करते हैं, कुछ तो केवल अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ की कामना के लिए आ रहे हैं. आने वालों तमाशबीनों की संख्या भी कम नहीं है.

पिपरिया के स्थानीय एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी ने बताया कि भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में कभी भी कोई दुर्घटना होने की आशंका भी बढ़ रही है. दरअसल यह सब नवरात्री के समय वाट्सऐप पर एक मैसेज के वायरल होने से शुरू हुआ. इस मैसेज में बताया गया कि यह पेड़ जादुई है. पहले तो लोग कौतुहलवश इसे देखने पहुंच रहे थे लेकिन धीरे धीरे यह भीड़ श्रृद्धालुओं में तब्दील हो गई.

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व 524 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इससे लगे हुए पचमढ़ी और बोरी वाइल्डलाइफ सैंचुरी मिलाकर मध्यभारत के 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए एक सुगम रिहाइश बनाते हैं. लेकिन इस तथाकथित जादुई पेड़ की पर आने वाले श्रृद्धालुओं  और इनके द्वारा यहां लाखों की संख्या में हर रोज लगाई जाने वाली सुगंधित अगरबत्तियों की गंध से वन्यजीवों की दिनचर्या पर असर पड़ सकता है.

वन विभाग के कर्मचारियों ने पहले तो यहां आने वाले लोगों को रोकने की कोशिश की लेकिन जब वो सफल नहीं हुए तो अब वन विभाग इन्हें व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रहा है.

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