खेल - कूद

मैराथन धाविका पारुल और चिंता ने कहा, यूपी में लड़कियों के प्रति रवैया बदलने की जरूरत

नई दिल्ली 
एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन में एलीट भारतीय महिला वर्ग में मेरठ की पारुल चौधरी ने दूसरा तो देवरिया की चिंता यादव ने तीसरा स्थान हासिल किया। रविवार को यहां आयोजित इस हाफ मैराथन में अपने प्रदर्शन से दोनों खुश थीं लेकिन जब उनसे नवभारत टाइम्स ने पूछा कि आखिर क्या वजह है कि क्षेत्रफल में लगभग दोगुना होने के बाद भी उनके राज्य यूपी की लड़कियां मेडल के मामले में हरियाणा की लड़कियों से मात खा जाती हैं तो दोनों का दर्द छलक उठा। पारुल और चिंता ने जो सबसे पहला कारण बताया वह यह कि हरियाणा में लड़कियों के प्रति नजरिया बदल गया है। उन्हें खेलने की पूरी छूट मिलती है लेकिन यूपी में अभी भी लोगों का नजरिया नहीं बदला है। लोग अभी भी लड़कियों को खेलने की आजादी नहीं देते। 

ग्रामीण क्षेत्र में समस्या जटिल 
देवरिया की रहने वाली चिंता ने बताया, 'मैंने देखा है कि लोग अभी भी अपनी बेटियों को खेल में करियर बनाने की आजादी नहीं दे रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थितियां काफी खराब हैं। मैं सुना करती थी कि हरियाणा में लड़कियों पर काफी पाबंदियां होती हैं लेकिन वहां की लड़कियां हमसे बेहतर हैं। तभी वह हमसे खेल में काफी आगे हैं।' 

सुविधाओं की भी कमी 
दिल्ली के करीबी शहर मेरठ की पारुल ने लड़कियों पर पाबंदी की बात तो स्वीकारा ही साथ ही यह भी कहा कि हरियाणा की तुलना में यूपी में सुविधाएं भी बहुत कम हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं में प्रगति नहीं हुई है। दूसरा सरकार के रवैये में भी काफी फर्क है। हरियाणा में खिलाड़ियों को काफी कैश अर्वार्ड मिलते हैं जबकि हमारे यहां यह बहुत कम है। यह भी एक वजह है जिसके चलते बच्चे खेल में आना नहीं चाहते।' 

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