उत्तर प्रदेश

मुलायम सिंह पर ‘मुलायम’ हुईं मायावती, केस वापसी की अर्जी: गेस्ट हाउस कांड

 
लखनऊ

यूपी की सियासत में पिछले तीन दशक के सबसे चर्चित गेस्ट हाउस कांड में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा वापसी की अर्जी दी है। 2 जून 1995 को राजधानी के स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती के साथ एसपी नेताओं ने कथित रूप से बदसलूकी की थी। मामले में मुलायम सिंह यादव, उनके भाई शिवपाल सिंह यादव, बेनी प्रसाद वर्मा और आजम खान सहित कई नेताओं के खिलाफ मायावती की ओर से हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया था।

बीएसपी के एक वरिष्ठ नेता ने केस वापसी की अर्जी दिए जाने की पुष्टि की है। सूत्रों का कहना है कि अर्जी केवल मुलायम के लिए ही दी गई है। बाकी नामों पर पहले का रुख कायम है।

गठबंधन के बाद हुई थी पहल
बीएसपी के एक नेता का कहना है कि 12 जनवरी को एसपी-बीएसपी के बीच लोकसभा चुनाव के लिए हुए गठबंधन के दौरान ही इसकी भूमिका बनी थी। सपा के शीर्ष नेतृत्व ने मायावती से मुलायम के खिलाफ मुकदमा वापस लेने का अनुरोध किया था। मायावती ने 19 अप्रैल को मैनुपरी में मुलायम के साथ 24 साल बाद न केवल मंच साझा किया बल्कि उनके लिए वोट भी मांगे थे। इस दौरान भी मायावती ने गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए इसे भूलने की वजह भी गिनाई थी। वहीं, मुलायम ने कहा था, 'मायावतीजी ने बहुत साथ दिया है। इनका अहसान कभी मत भूलना।' हालांकि चुनाव के बाद यह गठबंधन टूट गया।

गेस्ट हाउस में हुई थी बदसलूकी
1993 में एसपी-बीएसपी साथ चुनाव लड़े थे और तब इस गठबंधन ने अपनी सरकार भी बनाई थी। तत्कालीन एसपी मुखिया मुलायम सिंह यादव सीएम बने, लेकिन दो साल में ही इतनी खटास आ गई कि गठबंधन टूटने की नौबत आ गई। 2 जून 1995 को मायावती ने स्टेट गेस्ट हाउस में बीएसपी विधायकों की बैठक बुलाई। एसपी को भनक लगी कि बीएसपी गठबंधन तोड़ने जा रही है तो सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ एसपी नेताओं ने गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया। इससे बचने के लिए मायावती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। आरोप है कि इस दौरान एसपी नेताओं ने दरवाजा तोड़ दिया और मायावती के साथ बदसलूकी हुई। उन्हें गाली-गलौज व जातिसूचक शब्द कहे गए। किसी तरह से मायावती वहां से बचकर निकल सकीं। अगले दिन ही उन्होंने बीजेपी की मदद से सरकार बनाई और खुद मुख्यमंत्री बनीं।
 

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