राजनीति

मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष संजय निरुपम ने पार्टी को क‍िया आगाह

मुंबई
महाराष्‍ट्र में लगातार जारी सियासी उठापटक के बीच मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष संजय निरुपम ने पार्टी आलाकमान को चेतावनी दी है कि वर्तमान राजनीतिक हालात में शिवसेना को समर्थन देना पार्टी के लिए विनाशकारी साबित होगा। संजय निरुपम का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब शिवसेना ने कहा कि कांग्रेस महाराष्‍ट्र की दुश्‍मन नहीं है। वहीं कांग्रेस के एक अन्‍य नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि राज्‍यपाल को कांग्रेस-एनसीपी को सरकार बनाने का न्‍योता देना चाहिए। इस बीच कांग्रेस ने किसी भी प्रकार की टूट से बचाने के लिए अपने विधायकों को जयपुर भेज दिया है।
संजय निरुपम ने ट्वीट कर कहा, 'महाराष्‍ट्र के वर्तमान राजनीतिक गणित के मुताबिक कांग्रेस-एनसीपी के लिए के लिए सरकार बनाना असंभव है। इसके लिए हमें शिवसेना की जरूरत होगी। और हमें किसी भी परिस्थिति में शिवसेना के साथ सत्‍ता के बंटवार के बारे में निश्चित रूप से विचार नहीं करना चाहिए। यह पार्टी के लिए विनाशकारी कदम होगा।'

एनसीपी बोली, हम बनाएंगे सरकार
इस बीच कांग्रेस के एक अन्‍य वरिष्‍ठ नेता मिलिंद देवड़ा ने भी राज्यपाल से कांग्रेस-एनसीपी को सरकार बनाने के लिए न्योता देने की अपील की है। उन्होंने रविवार को अपने एक ट्वीट में लिखा, 'बीजेपी-शिवसेना ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया है, ऐसे में महाराष्ट्र के राज्यपाल को प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े गठबंधन एनसीपी-कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।'

उधर, एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि अगर बीजेपी और शिवसेना सरकार बनाते हैं तो हम विपक्ष में बैठेंगे। यदि वे सरकार नहीं बनाते हैं तो कांग्रेस और एनसीपी एक वैकल्पिक सरकार बनाने का प्रयास करेंगे। उन्‍होंने कहा कि एनसीपी ने 12 नवंबर को सभी विधायकों की बैठक बुलाई है और इसमें राज्‍य के वर्तमान राजनीतिक हालात पर विस्‍तार से चर्चा होगी।

राउत बोले, कांग्रेस दुश्मन नहीं
इससे पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में रविवार को एक बार फिर एनसीपी चीफ शरद पवार की तारीफ की है, जो एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना दोस्ती का संकेत दे रही है। सामना में शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि (सरकार बनाने में) प्रदेश के बड़े नेता शरद पवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भी कई विधायक सोनिया गांधी से मिले और उनसे महाराष्ट्र का फैसला महाराष्ट्र को सौंपने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महाराष्ट्र की दुश्मन नहीं है। सभी दलों में कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं।

सदन का गणित
महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव बीजेपी-शिवसेना महायुति और कांग्रेस-एनसीपी महागठबंधन ने मिलकर लड़ा था। मतदान 21 अक्टूबर को और मतों की गणना 24 अक्टूबर को हुई थी। चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 105 सीटें, शिवसेना ने 56 सीट, एनसीपी ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की। चुनाव नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच विवाद हो गया। इसके चलते किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया, क्योंकि बहुत के 145 विधायक किसी के पास नहीं थे।

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