मध्य प्रदेश

ब्यूरोक्रेसी-पॉलिटिकल प्रेशर की चर्चा, घोटाले में जांच के बजाय करा रहा नए टेंडर

जबलपुर
बिदाउट टेंडर प्राइवेट वेंडर से कराए जा रहे भूमि सीमांकन घोटाले में जांच की बजाय जिला प्रशासन नए टेंडर करा रहा है। इस चक्कर में जिला प्र्रशासन के गलियारों में मामला खासा चर्चा का विषय बन गया है। चूंकि प्रकरण पर एक बार अपर कलेक्टर स्तर पर जांच प्रस्तावित हो चुकने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया है इसलिए तरह-तरह की बातें कही सुनी जा रही हैं।

जानकारों के मुताबिक यदि मामले की जांच हो गई तो साल 2013-14 से लेकर अब तक पदस्थ एसडीएम,तहसीलदार,नायब तहसीलदार,राजस्व निरीक्षक,पटवारी सहित समूचा भू-अभिलेख कार्यालय इसमें उलझ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि टोटल स्टेशन मशीन से जमीन सीमांकन की ट्रेनिंग के बावजूद आरआई-पटवारी स्वयं सीमांकन नहीं करते हैं बल्कि बिना टेंडर के प्राइवेट वेंडर बुला कर हजारों-लाखों रुपए देकर सीमांकन कराया गया है। उसी रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार-एसडीएम ने आदेश कर रखे हैं। यहां तक कि स्वयं एसडीएम-तहसीलदार की जानकारी मेंं आवेदकों की प्राइवेट वेंंडर से सौदेबाजी करार्ई गई है जिसमें आरआई-पटवारियों की महती भूमिका रही है।

इसलिए अब यह मामला तूल न पकड़े इसके लिए प्रशासन पर पॉलिटिकल और ब्यूरोक्रेसी दोनो ओर से प्रेशर बनाया जा रहा है, वहीं नया टेंडर करा पुराने मामले पर पर्दा डालने और सब कुछ लीगल वे पर चल रहा है यह दिखाने कोशिश की जा रही है। इसीलिए प्राइवेट वेंडर से सीमांकन वाली फाइल को भू-अभिलेख दफ्तर से भू-प्रबंधन के पाले में डाल दिया गया है।

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