छत्तीसगढ़

बाल अधिकारों के उल्लघंन के शिकायतो की सुनवाई 29 को

कोण्डागांव।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 एवं संविधान में निहित तथा अन्य अधिनियम के तहत बालकों को प्रदत्त अधिकार प्राप्त करने हेतु उन्हें सक्षम बनाना है। इसके तहत किसी भी प्रकार के बाल अधिकारों के उल्लंघन जैसे इलेक्ट्रॉनिक, सामाजिक, प्रिंट मीडिया में बाल अधिकारों का हनन, स्कूलों, पड़ोसियों द्वारा बच्चों का शोषण एवं स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी, बच्चों के प्रतियोगिता परीक्षा शुल्क संबंधी शिकायत, स्कूलों में बच्चों के साथ शारीरिक शोषण अथवा प्रताड?ा की शिकायत, बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं देना, विकलांगता संबंधित शिकायत, भेदभाव पूर्ण व्यवहार करना एवं शोषण से पीड़ितों को मुआवजा दिलाना, चिकित्सा संबंधी लापरवाही, बालकों के मामलों में निष्क्रियता, बच्चों के रोग संबंधी उपचार में चिकित्सा लापरवाही, मध्यान्ह भोजन ना मिलना, नशा मुक्ति, पुनर्वास संबंधित शिकायत एवं निराकरण, किसी व्यक्ति अथवा संस्था की लापरवाही के कारण हुई बच्चों की मृत्यु, बच्चों का अपहरण, बाल श्रमिक के रूप में खतरनाक स्थान पर बच्चों का उपयोग, किसी भी प्रकार के परिश्रम या क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त ना होना, बच्चों द्वारा सड़क पर सामान विक्रय करना, एसिड अटैक संबंधी मामले, माता-पिता, अभिभावक, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बच्चों का भिक्षावृत्ति हेतु उपयोग करना, बच्चों को भिक्षावृत्ति करने हेतु मजबूर करना बच्चों को शारीरिक शोषण, लैंगिक हमला, परित्यक्त अथवा उपेक्षित किया जाना, घरेलू हिंसा से पीड़ित बच्चे एचआईवी से ग्रसित बच्चों से भेदभाव करना, पुलिस द्वारा शोषित, प्रताड़ित बच्चे, बाल देखरेख संस्थाओं मे प्रताड़ित शोषित बच्चे, बच्चो का अवैध रूप से गोद लेना, बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों का मानव तस्करी, बच्चों के खिलाफ हिंसा करना जैसी घटनायें शामिल है। उपरोक्त में से किसी भी प्रकार के प्रकरण के संबध मे दिनांक 29 नवंबर 2019 को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष कोण्डागांव में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग दिल्ली के समक्ष शिकायत दर्ज करायी जा सकती हैं।

 

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