देश

पीएम मोदी ने पहले ही दिया था संकेत, लॉकडाउन 4.0 के नए रंगरूप में राज्यों की जवाबदेही ज्यादा

 नई दिल्ली 
कोरोना से जंग में प्रभावी लॉकडाउन का चौथा चरण पिछले तीन हिस्सों के लॉकडाउन से कई मायनों में अलग होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पहले ही संकेत दे दिया था। दरअसल, केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के व्यापक दिशानिर्देश तो तय कर दिए हैं, लेकिन इसे किस तरह से, किस हद तक लागू किया जाना है या नहीं यह फैसला राज्यों पर छोड़ दिया है।

साफ है कि अब कोरोना से निपटने के लिए राज्यों की जवाबदेही ज्यादा होगी। पिछले तीन चरणों में कई राज्यों ने और राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की थी कि वह राज्यों पर अपनी कई पाबंदियां थोप रहा है और राज्यों को अपने ढंग से काम करने का मौका नहीं मिल रहा है।
 
पश्चिम बंगाल के साथ तो कई मौकों पर टकराव भी हुआ और कांग्रेस शासित राज्यों ने भी सवाल उठाए थे। इसलिए प्रधानमंत्री ने देशभर के मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी पिछली बैठक में साफ कर दिया था कि वे अगले लॉकडाउन की घोषणा में राज्यों द्वारा दिए गए सुझावों का ध्यान रखेंगे और उसी के अनुसार दिशानिर्देश तय किए जाएंगे।
 
रविवार (17 मई) को जब गृह मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए तो साफ हो गया कि वह प्रधानमंत्री के वादे के अनुसार ही हैं। अब राज्य सरकार खुद तय करेगी। हर जिले तक यह तय होगा कि वहां पर किन क्षेत्रों में किस तरह से लॉकडाउन के किन नियमों को लागू किया जाएगा। राज्यों के अंदर और अंतर राज्य बस सेवाओं को भी अब राज्य खुद तय करेंगे। इससे प्रवासी मजदूरों की समस्या का हल निकाला जा सकता है।
 
गौरतलब है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में स्थिति काफी गंभीर है और वहां की सरकार प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा सख्त रणनीति के साथ सामने आ सकती है, जबकि केरल जिसने कोरोना पर काफी हद तक काबू पा लिया है, वह लॉकडाउन 4.0 में ज्यादा ढील अपने राज्य के भीतर दे सकता है। राज्यों के बीच बसों या वाहनों की आवाजाही पर राज्य संयुक्त रणनीति बना सकते हैं।

Tags

Related Articles

Back to top button
Close