मध्य प्रदेश

नेताजी सुभाष की पड़पोती ने कहा गोडसे नहीं नेहरू हैं गांधीजी के हत्या के जिम्मेदार

ग्वालियर
महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा-आरती का मामला आज उस वक्त फिर गरमा गया जब हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पड़पोती राजश्री चौधरी ने एक बार फिर गोडसे की अरती उतारी। इतना ही नहीं उन्होंने पिछले दिनों गोडसे की पूजा करने के मामले में हिमस कार्यकर्ता पर मुकदमा दर्ज किए जाने का विरोध भी किया। राजश्री ने चेतावनी दी कि यदि हमारे कार्यकर्ता को  गिरफ्तार किया गया तो हिमस कार्यकर्ता संसद पर प्रदर्शन करेंगे।

बताना मुनासिब होगा कि गत 15 नवंबर को हिमस कार्यकर्ताओं ने दौलतगंज स्थित पार्टी कार्यालय पर नाथूराम गोडसे का बलिदान दिवस मनाते हुए आरती की और प्रशासन को ज्ञापन देकर गोडसे को शालेय शिक्षा के पाठ्यक्र में शामिल करने की मांग भी की। गोडसे की आरती पूजा के मामले को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया और प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद हिमस कार्यकर्ता नरेश बाथम व उसके साथियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।

इसके बाद आज रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आईं हिमस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पड़पोती राजश्री चौधरी ने लक्ष्मीबाई की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की साथ ही हिमस के पार्टी कार्यालय पर नाथूराम गोडसे की पूजा अर्चना की।

इस बीच मीडिया से बातचीत में राजश्री चौधरी ने कहा कि गांधी की हत्या के जिम्मेदार तो असल में नेहरू व उनकी तत्कालीन सरकार थी, न कि गोडसे। अपनी बात को पुष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक जाहिर नहीं हुई। मरने के बाद भी 40 मिनट तक वहीं रखे रहे, सरकार व उसके कारिंदे उन्हें हॉस्पिटल तक लेकर नहीं गए।

एक सवाल के जवाब में राजश्री ने कहा कि भारत के बंटवारे के लिए गांधीजी जिम्मेदार थे। पार्टीशन में लाखों परिवार तबाह हुए। हम तो अखंड भारत चाहते थे, लेकिन गांधीजी ने पार्टीशन होने दिया। उन्होंने कहा कि गोडसे नेता हैं और पूज्यनीय हैं। उनकी पूजा करने पर हमारे कार्यकर्ता पर जिस तरह मुकदमा दर्ज किया गया है, वह अन्याय है। कांग्रेस शुरू से ही अन्याय करती रही है। जबकि गोडसे का स्वतंत्रता आंदोलन में जो योगदान था उसे भुलाया नहीं जा सकता है।

 

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