उत्तर प्रदेश

 डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित किया, जांच में निकला जिंदा

लखनऊ
उस मरीज की सांसें चल रही थीं। दिल धड़क रहा था। नब्ज और ब्लड प्रेशर भी ठीक था। इसके बावजूद लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मरा घोषित कर दिया और शव ले जाने को कहा। बिना देखे मरीज को मृत घोषित करने का ऐलान सुनकर परिवारीजन भड़क उठे।

 सीतापुर निवासी कांता प्रसाद बेटे विकास (25) को बेहोशी की हालत में लेकर बुधवार सुबह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। परिवारीजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत बताई। वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर लोहिया संस्थान रेफर कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे परिवारीजन विकास को एम्बुलेंस से लेकर लोहिया संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक की इमरजेंसी में पहुंचे। मरीज को एम्बुबैग के सहारे सांसें दी जा रही थीं। परिवार का सदस्य इमरजेंसी में गया। डॉक्टर को मरीज की सेहत का हाल बताया। इलाज संबंधी कागजात दिखाए।

 डॉक्टर ने मरीज को बिना देखे मरीज को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के इस रवैये पर परिवार वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। बवाल से बचने के लिए डॉक्टरों ने कर्मचारियों को इमरजेंसी में भेजा। मरीज की ईसीजी जांच कराई। ब्लड प्रेशर जांचा। शरीर में ऑक्सीजन के स्तर का पता करने के लिए जांच की। सब ठीक निकला।

 परिवारीजनों ने इलाज में बदइंतजामी व डॉक्टर पर कोताही का आरोप लगाया। नाराज परिवारीजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए। परिवारीजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने बाद में मरीज को वेंटिलेटर देने से भी इनकार कर दिया, जबकि इमरजेंसी में एक वेंटिलेटर घटना के वक्त खाली था। दूसरी तरफ संस्थान के डॉक्टरों ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। कहा कि मरीज को केजीएमयू में मृत बताया गया था। यहां जांच में मरीज की सांसें चल रही थीं।

Related Articles

Back to top button
Close