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डिफेंस स्वदेशीकरण पर रावत ने क्या कहा?

नई दिल्ली
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में स्वदेशी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि स्वदेशीकरण होने पर सेना को गोला बारूद भी ज्यादा स्टोर करने की जरूरत नहीं होगी। इससे बड़ी संख्या में गोला बारूद नष्ट नहीं करना पड़ेगा, मैन पावर की बचत होगी साथ ही जमीन भी बचेगी, जिसका दूसरा इस्तेमाल किया जा सकता है।

जब जरूरत तब इंडस्ट्री से मिल जाएगा गोला-बारूद
दरअसल अभी सेना 40 दिन का एम्युनिशन (गोला-बारूद ) स्टोर करती है। यानी अगर युद्ध के हालात बन जाए तो कम से कम 40 दिन तक लगातार लड़ाई लड़ने के लिए एम्युनिशन पूरा होना चाहिए। सीडीएस जनरल रावत ने कहा कि स्वदेशीकरण होने पर जब हथियार और गोला-बारूद सब भारत में ही बनने लगेंगे तो फिर ज्यादा स्टोर करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। जब भी जरूरत होगी तो इंडस्ट्री उसकी आपूर्ति कर देगी।

10-15 साल बाद गोला-बारूद हो जाता है खराब
उन्होंने कहा कि गोला-बारूद 10-15 साल बाद खराब हो जाते हैं और अगर इस पीरियड में उनका इस्तेमाल नहीं किया गया तो फिर उन्हें नष्ट करना पड़ता है। इतना ही स्टॉक होना चाहिए जो इस्तेमाल कर सकें, यह तब होगा जब स्वदेशीकरण होगा। जनरल रावत ने कहा कि गोला बारूद स्टोर करने की जगह भी दूर दूर बनानी होती है इसमें बहुत सारी जमीन लग जाती है। साथ ही इनकी कड़ी निगरानी भी करनी होती है। कम स्टॉक होगा तो जमीन भी बचेगी और मैन पावर का भी कहीं और इस्तेमाल किया जा सकेगा।

क्या कम कर सकते हैं स्टैंडर्ड?
जनरल बिपिन रावत ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में स्वदेशी इंडस्ट्री विकसित हो इसके लिए GSQR (जनरल स्टाफ क्वॉलिटेटिव रिक्वायरमेंट ) को क्या थोड़ा लचीला बनाया जा सकता है। GSQR मतलब कि सेना को क्या हथियार चाहिए और उसमें क्या क्या खूबियां होनी चाहिए। GSQR के आधार पर ही फिर किसी कंपनी के बनाए सामान को चुना जाता है। जनरल रावत ने कहा कि हमें GSQR यह देखकर बनाना चाहिए कि हमें किससे क्या खतरा है और हमारी क्या जरूरत है। ना कि दूसरे देशों के पास क्या है वह देखकर।

दूसरे देशों को देखकर ना बनाएं GSQR
दूसरे देशों के हथियारों को देखकर GSQR बनाते हैं तो फिर उसमें हमारे देश की इंडस्ट्री को जगह नहीं मिल पाती क्योंकि अभी उनके पास वह टेक्नॉलजी नहीं है। जनरल रावत ने कहा कि क्या हम क्वॉलिटी से समझौता किए बगैर परफॉर्मेंस के संदर्भ में कुछ स्टैंडर्ड को कम कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे अगर अमेरिका के पास कोई मिसाइल 7 किलोमीटर तक फायर करती है क्या हम अपने GSQR में उसे 5 किलोमीटर कर सकते हैं। एक बार हमारी इंडस्ट्री उसे बना लेती है तो फिर उसे धीरे धीरे बढ़ाकर 7 किलोमीटर रेंज तक किया जा सकता है।

एक्सेप्टेबिलिटी आधार पर तैयार हो GSQR
अभी हमारे देश में 5 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल बना भी ली तो हम उसे ले नहीं करते क्योंकि GSQR बदल नहीं सकते। उन्होंने कहा कि GSQR इस तरह बनाना चाहिए जिसमें हम एक्सेप्टेबिलिटी (स्वीकार्यता) भी दें और डिजायरबिलिटी (इच्छा) भी दें। यानी हम कितने तक का परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड स्वीकार कर सकते हैं यह भी बताएं साथ ही यह बताएं कि हमारी इच्छा किस स्तर तक के परफॉर्मेंस की है।

अपनी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए GSQR में लचीलापन जरूरी
जनरल रावत ने कहा कि अगर हमें अपनी इंडस्ट्री को बढ़ाना है तो GSQR थोड़ा लचीला होना चाहिए। अगर हमें पश्चिम देशों जैसा ही सबकुछ चाहिए तो हम अपनी इंडस्ट्री डिवेलप नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम कहते हैं कि हम अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री डिवेलप करेंगे और फिर एक्सपोर्ट करेंगे। लेकिन अगर हमारे देश की सेना ही उसका इस्तेमाल नहीं करेगी तो इंपोर्ट करने वालों को भरोसा कैसे आएगा।

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