खेल - कूद

ट्रैक पर लौटीं दुती चंद अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिलने से निराश, कहा- 3 वर्षों से किया जा रहा नजरअंदाज

 नई दिल्ली
भारत की सबसे तेज दौड़ने वाली महिला ऐथलीट दुती (Dutee Chand) चंद एक बार फिर ट्रैक पर लौट आई हैं। स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खोलने की अनुमति मिलने की खबर मिलते ही दुती अपनी स्पाइक्स के साथ स्टेडियम पहुंच गईं। भुवनेश्वर से दुती ने बताया, ‘स्टेडियम खुलने की खबर अच्छी थी। मैं घर पर हल्का-फुल्का अभ्यास ही कर पाती थी, लेकिन मैं स्प्रिंटर हूं, मुझे ट्रैक चाहिए। जब आप दौड़ते हैं तो आपको अहसास होता है कि आप हवा को चीर रहे हैं। वह अहसास खास होता है और मैं उसको फिर से जीना चाहती थी।’

बदला-बदला नजारा
कलिंगा स्टेडियम अमूमन ऐथलीटों से भरा रहता है, लेकिन दुती जब सोमवार की सुबह वहां पहुंचीं तो नजारा बिल्कुल अलग था। 100 मीटर दौड़ की नैशनल रेकॉर्ड होल्डर इस रनर ने कहा, ‘मैं जानती थी कि स्टेडियम में ज्यादा लोग नहीं होंगे, इसके बावजूद जब स्टेडियम में सन्नाटा पसरा देखा तो बहुत अजीब लगा। मैंने इस स्टेडियम को हमेशा ऐथलीटों से भरा देखा है।’ दुती के साथ ट्रेनिंग के लिए अमिया मलिक भी पहुंचे जो कि मेंस कैटिगरी के 100 मीटर रेस में नैशनल रेकॉर्ड होल्डर हैं। दुती ने बताया, ‘स्टेडियम में ऐथलीट के नाम पर सिर्फ हम दोनों ही थे। न कोई कोच, न ट्रेनर। कई लोग दूसरे शहरों से हैं और जब तक लॉकडाउन खत्म नहीं होता तब तक उनका आना भी मुमकिन नहीं।’

अभी वक्त लगेगा
दुती मानती हैं कि स्टेडियम खुल जाने का मतलब यह नहीं है कि अचानक से सब कुछ पटरी पर लौट आएगा। उन्होंने कहा, ‘मैं सुबह ढाई घंटे ट्रेनिंग करती हूं, लेकिन फिलहाल तो घंटे भर हो रही है। अभी मुझे उस जूनुन की कमी नजर आ रही है जो ट्रेनिंग में होना चाहिए। फिलहाल कॉम्पिटिशन का कोई टारगेट भी नहीं है। लय पकड़ने में थोड़ा वक्त लगेगा। बॉडी पर अचानक ज्यादा लोड भी नहीं डाल सकते।’

अवॉर्ड के लिए गुहार
जकार्ता एशियन गेम्स में 100 मीटर और 200 मीटर में सिल्वर मेडल जीतने वाली दुती को अभी तक अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिला है। इससे वह निराश हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले तीन सालों से मैं अर्जुन अवॉर्ड के लिए योग्य उम्मीदवार रही हूं, लेकिन किसी तालमेल की कमी के कारण मेरे आवेदन पर विचार नहीं किया जा रहा है। मैं प्रार्थना करती हूं कि मजबूती से मेरे नाम की अनुशंसा करें।’
 

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