दुनिया

एसपीआर से तेल निकालने को मजबूर अमेरिका

 

डॉयचे वेले,दिल्ली

तेल की कीमतों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को परेशान कर दिया है. ओपेक देश उनकी बात मान नहीं रहे तो उन्होंने भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से साथ आने का आग्रह किया है.उत्पादन बढ़ाने के लिए तेल उत्पादक देशों पर अमेरिका का दबाव लगभग बेकार गया है. अब वह भारत और जापान आदि देशों से अपनी बचत से तेल निकालने को कह रहा है. लेकिन इस पूरे वाकये से यह सबक भी मिला है कि तेल उत्पादक देश चाहें भी तो ज्यादा तेल उत्पादन नहीं कर सकते. ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) और उसके सहयोगी देशों ने 2020 में जो पाबंदियां सप्लाई पर लगाई थीं, वे हटाना शुरू तो किया है लेकिन उसकी रफ्तार उतनी नहीं है जितनी अमेरिका चाहता है. इसलिए कीमतें तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. रूस को मिलाकर बने ओपेक प्लस देशों ने उत्पादन बढ़ाने के अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है. वह रोजाना चार लाख बैरल उत्पादन बढ़ाने की अपनी योजना पर कायम हैं.
 
उनका कहना है कि अगर इससे ज्यादा तेजी से उत्पादन बढ़ाया गया तो 2022 में कीमतें बहुत ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. रिजर्व में हाथ डालेगा अमेरिका ऐसी संभावनाएं जताई जा रही हैं कि ऊर्जा कीमतों को कम करने के लिए अमेरिका ने एशियाई देशों के साथ मिलकर अपने आपातकालीन स्टॉक में से कर्ज पर तेल देने की योजना बनाई है जिसका ऐलान मंगलवार को हो सकता है. अमेरिका में गैसोलीन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बहुत ज्यादा बढ़ने से राष्ट्रपति जो बाइडेन की लोकप्रियता को खासा धक्का पहुंचा है. इसका असर अगले साल होने वाले कांग्रेस चुनावों में उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है. इसलिए उनके पास फिलहाल आपातकालीन स्टॉक में से तेल निकालने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. इस आपातकालानी स्टॉक (स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व, एसपीआर) के लिए भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मिलकर अदला-बदली की योजना बना गई है. कैसे होती है अदला-बदली जो बाइडेन ने एशियाई देशों से भी आग्रह किया है कि अपने अपने एसपीआर में से तेल निकालें. भारत और जापान ऐसा करने के रास्ते खोजने में लग गए हैं. एशियाई देशों के साथ मिलकर अमेरिका की यह कोशिश तेल की कीमतें करने के अलावा तेल उत्पादक देशों के लिए एक तरह की चेतावनी भी है कि उन्हें बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कीमतें बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त उत्पादन करना चाहिए.

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