मध्य प्रदेश

उच्च शिक्षा विभाग: विभाग में क्यों नहीं रहना चाहते हैं अफसर

भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग में डेढ साल में करीब एक दर्जन आईएएस विदा हो गए हैं। एक समय विभाग में चार-चार आईएएस पदों को संभाल रहे थे। अब विभाग में सिर्फ प्रमुख सचिव अनुपम राजन और आयुक्त मुकेश शुक्ल ही रह गए हैं। आईएएस की आवाजाही में विभाग में काफी गड़बड़ियां भी हुई हैं। इससे विभाग में कोर्ट केस की संख्या बढ़ना तय माना जा रहा है।  

उच्च शिक्षा विभाग में ज्यादातर आईएएस अधिकारी रहना पसंद नहीं करते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि उन्हें सजा के तौर पर उच्च शिक्षा विभाग दिया जाता है। इसके चलते डेढ़ साल में डेढ़ दर्जन आईएएस अधिकारियों ने इस विभाग से छुट्टी पा ली।
      
उच्च शिक्षा विभाग काफी बड़ा है। अन्य विभागों की अपेक्षा यहां प्रोफेसर और कर्मचारियों के कई प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित हैं। ऐसी कई समस्याएं हैं, जिनमें आईएएस अधिकारी उलझना नहीं चाहते हैं।  

आशीष उपाध्याय ने आयुक्त रहते हुए तीन साल से ज्यादा वक्त विभाग में बिताया है। उपाध्याय पहले आईएएस थे, जो आयुक्त रहने के बाद विभाग में प्रमुख सचिव भी रहे, लेकिन उन्हें दोबार विभाग का पीएस नहीं बनाया गया जबकि नीरज मंडलोई आयुक्त होेने के बाद विभाग में प्रमुख सचिव रहे। कांग्रेस सरकार आने के बाद उन्हें दोबारा प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। एक समय विभाग में पीएस नीरज मंडलोई, सचिव अजीत कुमार, आयुक्त मुकेश शुक्ल और अपर आयुक्त वेद प्रकाश तक थे। जबकि आयुक्त रहते हुए सिर्फ व्हीएस निरंजन ने सचिव का प्रभार देते हुए पूरे विभाग को संचालित किया था।

ये रहीं खास समस्याएंं
पढ़ाई का कार्य छोड़ प्रोफेसर कमेटियों में व्यस्तता, ट्रांसफर-पोटिंग, पदनाम, समयमान-वेतनमान, वेतन विसंगति, छह साल में एमपीपीएससी से चयनित नियुक्तियां, कॉलेज और विवि में स्टाफ की कमी, कुलपतियों का शासन और रजिस्ट्रार से असमंजस, जनभागीदारी समिति के अध्यक्षों की नियुक्ति, रुसा और वर्ल्ड बैंक से मिलने वाली राशि का उपयोग, अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां, प्रोफेसर और अधिकारियों की प्रतिनियुक्तियां के साथ ऐसी कई समस्याएं हैं, जिनका तोड़ किसी अधिकारी के पास नहीं हैं। इसलिए आईएएस अफसर विभाग में रहकर सिर्फ अच्छा विभाग में पदस्थ होने के लिए अपना समय निकालना चाहते हैं। हर साल प्रवेश कराने और कॉलेजों को खोलने को लेकर नियमों में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। इससे विद्यार्थियों के अलावा कॉलेज संचालित करने वाली सोसायटियां विभागीय अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा नहीं करती हैं।

डेढ़ साल में बदले हुए आईएएस आॅफिसर

  • प्रमुख सचिव- नीरज मंडलोई, सलीना सिंह, हरिनंजर राव, नीरज मंडलोई और अब अनुपम रजन
  • आयुक्त- अजीत कुमार, राघवेंद्र सिंह, डीपी अहुजा और अब मुकेश शुक्ल
  • सचिव- अजीत कुमार, अपर संचालक जगदीश जटिया और अपर आयुक्त वेद प्रकाश
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