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आर्थिक पैकेज का भी फायदा नहीं! 5 फीसदी लुढ़क सकती है देश की इकोनॉमी

 
नई दिल्‍ली 

देश की इकोनॉमी को बूस्‍ट देने के लिए सरकार ने कुल 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 5 दिन प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर इस आर्थिक राहत पैकेज के बारे में जानकारी दी. हालांकि, दुनिया की चर्चित रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस को लगता है कि इस आर्थिक पैकेज से कोविड-19 का नकारात्मक असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा. वहीं, अमेरिका की ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन साक्स का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की गिरावट होगी. यह भारत का एक वर्ष का सबसे खराब प्रदर्शन होगा.

क्‍या कहा मूडीज ने?
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा कि सरकार द्वारा हाल में घोषित 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज से वित्तीय संस्थानों के लिए परिसंपत्तियों के जोखिम में कमी आएगी, लेकिन कोविड-19 का नकारात्मक असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा. मूडीज ने कहा, "सरकार के उपायों से वित्तीय क्षेत्र के लिए परिसंपत्तियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन वे कोरोना वायरस महामारी के नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह दूर नहीं कर पाएंगे."

एमएसएमई पैकेज के बारे में रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप से पहले ही यह क्षेत्र तनाव में था और आर्थिक विकास में मंदी गहराने के साथ ही नकदी की चिंताएं बढ़ जाएंगी. वहीं, नॉन बैंकिंग कंपनियों के उपायों के संबंध में टिप्पणी में मूडीज ने कहा गया कि यह मदद इन कंपनियों की तात्कालिक जरूरतों की तुलना में बहुत कम है.

अर्थव्यवस्था में 5% की गिरावट होगी
अमेरिका की ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन साक्स के मुताबिक आर्थिक मोर्चे पर भारत का प्रदर्शन किसी एक वर्ष का सबसे खराब होगा. पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी- मार्च) तिमाही के मुकाबले भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 45 प्रतिशत गिर सकता है. लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के लगातार बंद रहने की वजह से यह स्थिति बनी है.

गोल्‍डमैन साक्‍स का कहना है कि कामकाज शुरू होने पर जीडीपी सुधरेगा. गोल्डमैन साक्स ने इससे पहले 0.4 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान लगाया था जिसे बाद में उसने और बढ़ा कर पांच प्रतिशत कर दिया. जापानी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा इसी दायरे की गिरावट का अनुमान लगाया है.

फिच सॉल्यूशंस ने क्‍या कहा?
इसी तरह, रेटिंग एजेंसी फिच सॉल्यूशंस ने कहा कि कोविड-19 संकट से उबरने के लिए सरकार द्वारा घोषित 20.97 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज तात्कालिक चिंताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है. फिच सॉल्यूशंस के मुताबिक पैकेज के तहत दिया गया वास्तविक राजकोषीय प्रोत्साहन जीडीपी का सिर्फ एक प्रतिशत है, जबकि दावा किया गया है कि ये जीडीपी का 10 प्रतिशत है. बता दें कि कई एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आने का अनुमान लगा रही हैं. प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने के बाद भी उन्हें गिरावट की आशंका बनी हुई है.

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