ग्वालियर. श्योपुर के इस गांव में सदियों से कोई पक्के मकान नहीं बनाता। गांव में कई करोड़पति लोग भी कच्चे मकान में रहते हैं। कहा जाता है कि अजमेर वाले ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती इबादत के लिए यहां आए थे, तब से गांव के भले के लिए उनके आदेश पर लोगों ने पक्के मकान बनाना बंद कर दिए, बस एक मंदिर और दरगाह पक्की है। किसी ने पक्के मकान बनाए भी तो उनमें रह नहीं सका, और वो खंडहर बन गए 
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ख्वाजा ने कहा था कच्चे घरो में रहो, न अकाल सताएगा न महामारी....
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- श्योपुर से 20 किमी दूर बसा गांव निमोदा पीर यहां बनी अजमेर वाले ख्वाजा की छोटी दरगाह के लिए चंबल ही नहीं पड़ोसी राजस्थान के दूर दूर तक मशहूर है।
- करीब 200 घरों की आबादी वाले इस गांव में एक भी पक्का मकान आज तक नहीं बना है। इसलिए इस गांव को कच्चे मकानों का गांव कहा जाता है। 
- गांव के किसानों पर पर्याप्त संसाधन हैं कि अपने पक्के मकान बना सकें, लेकिन कोई बनाता नहीं, क्योंकि ख्वाजा का आदेश है, तबसे गांव में पत्थर, ईट और सीमेंट के इस्तेमाल से पक्का मकान बनाने पर पाबंदी हैं। जब भी किसीने भी पक्का मकान बनाने की कोशिश की उसे शारीरिक, आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
 
 
अकाल महामारी देख ख्वाजा ने कहा त्याग करो, कच्चे मकानों में रहो 
- गांव के पूर्व सरपंच राम प्रसाद मीणा का कहना है कि सदियों पूर्व जब सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती एकांत इबादत के लिए यहां आए थे तब गांव अकाल, महामारी जैसे संकटों से जूझ रहा था। 
- गरीब नवाज कहे जाने वाले ख्वाजा ने परेशानी देख गांव वालों को आज्ञा दी थी कि अगर खुशहाल रहना है तो अपने घर कच्चे ही बना कर रखें। बाबा की आज्ञा आज भी सब मान रहे हैं। राम प्रसाद का मानना है कि तब से गांव से सूखा, बीमारियां और फिरकापरस्ती हमेशा दूर रहती आई है। 
- गांव की नई पीढ़ी कच्चे मकानों में रहकर शर्मिंदगी जरूर महसूस करती है, लेकिन गांव के अमन-चैन के लिए उन्हें बाबा की अनोखी आज्ञा मंज़ूर है।

गांव में मन्दिर और दरगाह ही है पक्की इमारत
- इस गांव में पक्की इमारत के नाम पर 2 मंदिर और बाबा ख्वाजा निजामुद्दीन की दरगाह ही हैं। यहां कुछ पक्के मकानों के खंडहर भी मौजूद हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि, कुछ लोगों ने पक्के मकान बनवाए, लेकिन ऐसा करने पर कभी तेज बारिश हुई तो कभी भूकंप आया, और पक्के मकान ढह गए। यहां तक कि ख्वाजा के आदेश के डर से पक्के सरकारी स्कूल को भी गांव की हद से बाहर ही बनाया गया है।
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पक्के मकान बनाकर नहीं रह सका इसमें
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जिसने भी बनाए पक्के मकान हो गए खंडहर