रीवा।

हाईकोर्ट को गुमराह करना इमारत मलिक को महंगा पड़ गया है। ननि प्रशासन ने उसकी बिल्डिंग को न केवल तोड़ दिया है बल्कि तोड़ने में खर्च की वसूली संबंधित वसूलने के आदेश जारी कर दिए हैं। शहर के मध्य में स्थित सुभाष चौक में बनी डॉ. अशोक सिंह के यागवेन्द्र टॉवर को ननि का अमला मंगलवार की सुबह 8 बजे तोड़ने पहुचा था। तोड़ते समय विवाद न हो इसके लिए पुलिस बल तैनात किया गया था, जबकि नगर निगम अमले की अगुवाई ननि के ही कार्यपालन यंत्री शैलेन्द्र शुक्ल कर रहे थे। फीता लगाकर बिल्डिंग की माप, चूना लगाकर चिन्ह का लगाना और चिन्ह लगने के साथ ही जेसीबी की मदद से मकान की तोड़ाई देखने के लिए लोग इकट्ठा हो गए थे। तकरीबन 6 घंटे चले इस ऑपरेशन में बिल्डिंग अतिशेष हिस्से को तोड़ दिया गया।


क्या था मामला

डॉ. अशोक सिंह ने यादवेन्द्र टॉवर बनाने के लिए 24 बाई 40 फिट का भूखण्ड क्रय किया था जिसमें यागवेन्द्र टॉवर बनाने की उन्होंने ननि से ली थी। ननि प्रशासन ने उन्हें 4 मीटर चौड़ी एवं साढ़े 9 मीटर ऊचाई की इमारत खड़ी करने के लिए ननि फाउडेशन के अधिनियम के तहत परमीशन दी थी। जबकि उनके द्वारा निर्माण कार्य के दौरान 6 मीटर चौड़ा और साढ़े 11 मीटर ईमारत खड़ी की गई थी। जिस पर ननि प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी की थी। नोटिस की अपील हाईकोर्ट में की थी। जहां उन्होंने कोर्ट को भी गुमराह करने का प्रयास किया था। कोर्ट ने उक्त मामले में ननि आयुक्त से अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। कोर्ट में ननि प्रशासन द्वारा रखे गए साक्ष्य एवं नियमावली को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने बिल्डिंग के अतिशेष हिस्से को तोड़ने का फैसला ननि के पक्ष में सुनाया था।

इसको बनाया था बेस

मकान निर्माण में मिलने वाले परमीशन को लेकर डॉ. अशोक सिंह ने माननीय उच्च न्यायालय से अपील की थी कि मिलने वाली परमीशन के 10 परसेंन्ट एवं कम्पाउंड का निर्माण कार्य कराया जा सकता है इसे अनलीगल नहीं माना जा सकता। इस दलील को माननीय उच्च न्यायालय ने सही माना, लेकिन उनके द्वारा निर्माण कार्य कराए जाने के योग में कम्पाउंड 10 फीसदी से अधिक होने से उसे अनलीगल करार दिया है।

बजती रही फोन की घंटियां

ननि प्रशासन की जेसीबी मशीन जहां यादवेन्द्र टॉवर के अतिशेष निर्माण को तोड़ रही थी तो वहीं दूसरे तरफ डॉ. अशोक सिंह सत्ता के गलियारे में गहरी पैठ रखने वाले बड़े रसूखदार लोगों को फोन लगाते नजर आए। इस दौरान वह तकरीबन आधा दर्जन से अधिकबार प्रदेश के कद्दावर मंत्री एवं स्थानीय विधायक से भी बात करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। मोहलत मांगते रह गए लेकिन उन्हें मोहलत देने को ननि अमला तैयार न दिखा।

तोड़ने में 96 हजार आया खर्च

एक तरफ जहां डॉ. अशोक सिंह के टॉवर के अतिशेष निर्माण कार्य को ननि अमले ने तोड़ा तुरंत बाद उन्हें यह बताया गया कि आपके इस निर्माण कार्य को तोड़ने में ननि ने 96500 रुपए खर्च किए हैं। उक्त राशि का भुगतान भी आपको तीन दिन के अंदर करना है। अगर आपने यह राशि का भुगतान समय रहते नहीं किया तो आपके शेष बची बिल्डिंग के संपत्तिकर के रूप में जमा राशि से न केवल उक्त राशि वसूल की जाएगी बल्कि बिल्डिंग के निर्माण कार्य को भी सख्ती के साथ रोक दिया जाएगा। उक्त फरमान सुनने के बाद डॉ. अशोक सिंह शांत हो गए।

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नोटिस दिए जाने के बाद भी उक्त टॉवर के मालिकान द्वारा ध्यान नहीं दिया गया, जिसे मंगलवार को ननि ने अतिशेष भाग को तुड़वा दिया है। अतिशेष भाग को हटाने में जो भी खर्च आया है वह डॉ. अशोक सिंह को देना होगा।

शैलेन्द्र शुक्ला, कार्यपालन यंत्री, ननि।