इंदौर। साइबर सेल ने उद्योगपति के खाते से 20 लाख स्र्पए निकालने वाले शातिर ठग को यूपी से गिरफ्तार किया है। उसके एक साथी ने उद्योगपति के नाम की फर्जी आईडी बनवाकर मुंबई से नकली सिम निकलवाई। उसकी मदद से उद्योगपति के खाते का ओटीपी नंबर आ गया। उसके बाद खाते से दूसरे खाते में रुपए ट्रांसफर कर लिए। इस गिरोह में कई सदस्य हैं, जिनके तार मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड व यूपी से जुड़े हैं।

साइबर सेल के मुताबिक, मुंबई के उद्योगपति मुकुल अग्रवाल की पीथमपुर में भी दो कंपनी हैं। उनका तारपोलीन, कंबल व प्लास्टिक बैग बनाने का कामकाज है। 3 मई को उन्होंने शिकायत की कि 2 मई को उनकी मोबाइल सिम (वोडाफोन कंपनी) बंद हो गई।

एकाउंटेंट बिजान दत्ता ने बताया कि दो कंपनी के पलासिया स्थित बैंक ऑफ इंडिया के करंट एकाउंट में स्र्पए नहीं हैं। चेक करने पर पाया कि किसी बदमाश ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए 19 लाख 80 हजार स्र्पए निकाल लिए। मोबाइल सर्विस कंपनी से जानकारी ली तो पहले उसने तकनीकी समस्या बताई। बाद में कहा कि सिम गुमने की वजह से कांदिवली (मुंबई) से डुप्लीकेट सिम जारी हुई है। बदमाश ने इसके लिए उनके ही वोटर आईडी का उपयोग किया।

फर्जी दस्तावेज से खाता खुलवाया

साइबर सेल की जांच में पता चला कि जिस खाते में रुपया ट्रांसफर हुआ, वह चंदौसी के मोहम्मद जावेद के नाम पर है। पुलिस चंदौसी स्थित बैंक के माध्यम से उस घर तक पहुंची, जिसका पता बैंक खाते में था। वहां से मोहम्मद जावेद को पकड़ा गया।

पूछताछ में उसने अपना असली नाम नूर अहमद (27) निवासी संग्रामपुर (जिला बदायूं, यूपी) बताया। नूर ठगी करने के दौरान कभी जावेद तो कभी नूर नाम का इस्तेमाल करता था। जावेद के नाम से उसने फर्जी आध्ाार कार्ड, पैन कार्ड व अन्य दस्तावेज बना रखे थे। चंदौसी में वह जिस मकान में किराए से रहता था, उसने वहीं से फर्जी कागजात बनवाकर जावेद के नाम से बैंक खाता खुलवाया।

आठवीं पास ठग इस तरह शामिल हुआ गिरोह में

पुलिस के मुताबिक, नूर आठवीं तक पढ़ा है। इसके गिरोह के अन्य साथी आरिफ, अयूब, अकबर, आकिब, अरशद व सिराज फरार हैं। इनकी तलाश की जा रही है। ये मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में फैले हुए हैं। सभी की तलाश की जा रही है।

नूर को मसूरी व मुंबई पुलिस ठगी के में पहले भ्ाी गिरफ्तार कर चुकी है। पहले वह दिल्ली के कोल्ड स्टोरेज में नौकरी करता था। उसके साथी भी वहीं काम करते थे। इस दौरान वे ठगी करने लगे। ऑनलाइन ठगी में वह आसानी से नहीं पकड़े जाते थे। यह देख नूर गिरोह में शामिल हो गया और खाते में रुपए ट्रांसफर कराने लगा।

मोबाइल कंपनी के अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, मुंबई में वोडाफोन के कर्मचारी व अधिकारियों ने वोटर आईडी के आधार पर सिम फिर से जारी की। उन्होंने दस्तावेज में यह भी दर्शाया कि खुद अग्रवाल वहां आए थे। ऐसी स्थिति में ठग अग्रवाल बनकर वहां पहुंचा या फिर अन्य तरह से सिम हासिल की।

इन सभी की जांच की जा रही है। सर्विस कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यदि वह इसमें लिप्त पाए गए या फिर उनकी लापरवाही सामने आई तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अग्रवाल की कंपनी के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

इस तरह बचें ठगी से

एसपी ने बताया कि ठग अधिकतर करंट एकाउंट वालों को निशाना बनाते हैं। गिरोह के सदस्य करंट एकाउंट वालों को सर्च करते रहते हैं। ऐसी स्थिति में चौकन्ना रहना होगा। जब मोबाइल बंद हो जाए तो पुलिस व सर्विस सेंटर को तत्काल सूचना दें। खातों के पासवर्ड को सुरक्षित रखें। उन्हें किसी से शेयर ना करें।