भोपाल। रीवा जिले में स्थापित होने वाले 750 मेगावॉट के सोलर प्लांट से प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली मिलेगी। इसके लिए 17 अप्रैल को 3 डेवलपर से अनुबंध किया जाएगा। अक्टूबर 2018 तक बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। प्लांट से 76 फीसदी बिजली मप्र को एवं 24 फीसदी दिल्ली मेट्रो को दी जाएगी।

यह जानकारी मप्र ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष विजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने पत्रकारों को दी। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना से मप्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। एशिया में यह सबसे बड़ा सोलर प्लांट है, इससे विद्युत वितरण कंपनियों/पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को परियोजना अवधि में 4700 करोड़ की बचत होगी। परियोजना पर 4000 करोड़ का निवेश होगा।

हर साल बढ़ाएंगे 5 पैसे

सिसोदिया ने बताया कि निविदा में 14 राष्ट्रीय व 6 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया। इसमें सबसे कम 2.97 रुपए प्रति यूनिट की दर मिली। पत्रकारवार्ता में मौजूद नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया कि हर साल 5 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि होगी जो 15 साल बाद 3.30रु. फिक्स हो जाएगी।

एक सवाल पर उन्होंने माना कि परियोजना में विलंब हुआ है। लेकिन जिन 3 कंपनियों महेन्द्र सस्टेन, एक्मे एवं सोल एनर्जी से करार हुआ है यदि वे देरी करती हैं तो 1 लाख रुपए प्रतिदिन प्रति मेगावॉट की दर से जुर्माना वसूला जाएगा।

वैंकय्या-गोयल आएंगे

 

17 अप्रैल को मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी तथा दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन द्वारा तीनों डेवलपर से अनुबंध किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री एम वैंकय्या नायडू, पीयूष गोयल एवं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री पारस जैन भी मौजूद रहेंगे।

आंध्र प्रदेश में ज्यादा सस्ती

 

निगम ने सबसे सस्ती बिजली (3.30 रु.) का दावा किया है लेकिन बताया जाता है कि आंध्र प्रदेश पहले ही बाजी मार चुका है। वहां इससे भी कम दर (3.15 रु.) दर पर पहले ही करार हो चुका है।