इंदौर। शादी के बाद भी मन में एक कसक थी कि कहीं देश सेवा या नौकरी का जज्बा पीछे छूट रहा है। फिर लगा कि कोशिश करने से हार नहीं होती। खूब मेहनत की और पुलिस भर्ती में प्रवेश पाया। 9 महीने की मशक्कत के बाद आज आरक्षक बन गईं। ये दास्तां है दो महिला आरक्षकों की। एक का ढाई साल का बेटा है तो दूसरी की दो साल की बेटी। कई और लड़कियां मिलीं, जिनके आरक्षक बनने के पीछे की कहानी भी अलग-अलग रही।

पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) मूसाखेड़ी में मंगलवार को नव आरक्षकों का शपथ समारोह और परेड कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला थे। भोपाल में व्यस्तताओं के चलते वे आ नहीं पाए। 9 महीने चले बुनियादी प्रशिक्षण सत्र में 102 आरक्षक थे। इसमें 99 लड़कियां और 3 लड़के आरक्षक बन गए हैं। खास बात यह रही कि 49 लड़कियां अनुकंपा नियुक्ति पर थीं।

अब तक का सबसे छोटा बैच

पीटीसी एसपी ने बताया कि यह अब तक का सबसे छोटा बैच था। इसके पहले के सारे बैच में आरक्षकों की संख्या काफी हुआ करती थी।

इस महिला आरक्षक को थी तिहरी खुशी

इस बैच में मीना उपाध्याय नामक एक महिला आरक्षक थी, जिसे तिहरी खुशी मिली। होशंगाबाद निवासी मीना की शादी कुछ साल पहले रजनीश उपाध्याय से हुई। शादी के बाद पति-पत्नी ने पुलिसभर्ती का फार्म भरा। दोनों का सिलेक्शन हुआ। मीना को इंदौर तो पति को उमरिया का पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज मिला। इसी भर्ती में मीना की छोटी बहन वर्षा दुबे का भी सिलेक्शन हुआ और उसे भी इंदौर कॉलेज मिला। मंगलवार को इंदौर में मीना-वर्षा ने तो उमरिया में रजनीश ने आरक्षक की शपथ ली।

भारती और नीतू भी चर्चाओं में

बुरहानपुर में रहने वाली भारती हनोते भी काफी चर्चाओं में रही। वह पांच मीटर और आठ मीटर की पैदल चाल बाधा में फर्स्ट आई। भारती की दो साल की बेटी भी थी। उसकी देखभाल घर वालों ने की। झांसी की नीतू राजा भी महिला आरक्षक बनी। उसका ढाई साल का बेटा लक्ष्य है, जिसकी देखभाल ससुर रामेश्वर ने की। पति टेकचंद दिल्ली की एक कंपनी में कार्यरत है। परेड के दौरान तेज गर्मी के चलते दो महिला आरक्षकों को चक्कर आ गए।