इंदौर,। शहर के एक सरकारी गर्ल्स हॉस्टल की सौ से ज्यादा छात्राएं मंगलवार को कॉलेज नहीं जा सकीं। वजह सरकारी छुट्टी या कोई परेशानी नहीं, बल्कि वैलेंटाइन-डे होने से यह अनोखी बंदिश हॉस्टल प्रबंधन ने लगाई थी। हॉस्टल की सभी छात्राओं के सुबह से शाम तक बाहर निकलने पर पाबंदी रही। कुछ ने जरूरी काम बताया, फिर भी उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं मिली।

'नैतिकता' की इस सख्त पहरेदारी से परेशान हुईं ओल्ड जीडीसी परिसर में बने पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की लड़कियां। हॉस्टल में फर्स्ट ईयर से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रही छात्राएं रह रही हैं। हॉस्टल वार्डन ने एक दिन पहले ही सभी छात्राओं को निर्देश दिए थे कि वैलेंटाइन-डे पर कोई भी हॉस्टल से बाहर नहीं निकल सकेगा।

बात नहीं मानी तो गेट पर ताला लगा दिया जाएगा। कुछ छात्राओं ने कॉलेज और कक्षाओं की वजह से छूट मांगी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। छात्राओं के मुताबिक चार-पांच लड़कियां अलग से वार्डन से अनुमति लेने भी पहुंचीं।

गेट पर तैनात कर दी एक कर्मचारी

कुछ छात्राओं ने बताया उन्हें मंगलवार को ही कॉलेज में प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन जैसे काम थे। कारण बताने के बावजूद उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। पहरेदारी के लिए हॉस्टल कर्मचारी कमला सूर्यवंशी को दिनभर गेट पर ही तैनात रखा गया।

सिर्फ समझाया था

हॉस्टल वार्डन लता कनेश ने प्रतिबंध और तालाबंदी से इनकार किया। उनका कहना था छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर एक दिन पहले उन्हें समझाया था कि वे बाहर न जाएं। कर्मचारी कमला तो सुरक्षा के बतौर गेट पर तैनात रहती हैं।