भोपाल.देश के अखबारों की सुर्खियां बन चुके आकांक्षा मर्डर केस में सामने आया है कि उसके ब्वॉयफ्रेंड ने एक शिप, लग्जरी कार, डायमंड सेट, बंगला और करोड़ों की प्रॉपर्टी उसके नाम कर दी थी। आरोपी ने अपने पिता की तरफ से एक वसीयत एक ईमेल के जरिये आकांक्षा को भेजी गई थी, जिसमें उसके नाम ये सारी चीजें लिख दी गई थी। हालांकि, पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि ये ईमेल और वसीयत दोनों ही फर्जी थीं, जिसे अारोपी उदयन ने ही तैयार किया था

- उदयन आकांक्षा को अपनी हाईफाई लाइफस्टाइल से काफी हद तक इम्प्रेस कर चुका था, लेकिन उसे पूरी तरह अपने झांसे में लेने पिता के झूठे ई-मेल का इस्तेमाल किया।
- शातिर उदयन ने दुनिया की नजरों में उन्हें इंटरनेट की वर्चअल दुनिया में कहीं न कहीं जिंदा रखा था।
- मां इंद्राणी और पिता वीके दास की जान लेने के बाद गर्लफ्रेड आकांक्षा को पिता की फर्जी वसीयत में उसके नाम एक शिप, लक्जरी कार, 1 हजार डॉलर, डायमंड सेट, मकान समेत कई चीजें होने की बात कही।
- ऐसा करके उसने न सिर्फ अपने पिता को दुनिया के सामने जिंदा रखा, बल्कि उसे अपने प्यार और माता-पिता के द्वारा भी पसंद किए जाने का धोखा दिया।
- बता दें कि भोपाल में रहने वाले उदयन दास ने अपनी गर्लफ्रेंड आकांक्षा शर्मा की जुलाई 2016 में हत्या कर उसकी लाश अपने घर में ही सीमेंट के चबूतरा बनाकर दफन कर दी थी।
 

 

दोस्त बनकर अपनी पोस्ट को खुद ही लाइक करता था
 
- पांच घंटे चली पूछताछ में उदयन ने माता-पिता और आकांक्षा की हत्या कैसे की, इस बारे में सिलसिलेवार बताया। उसने अपने रहन-सहन को लेकर भी कई राज उगले।
- बांकुरा पुलिस को उसने पूछताछ में बताया है कि उसने कभी किसी को दोस्त माना ही नहीं। कुछ लोग मुझे दोस्त भले ही मानते थे, लेकिन मेरा कोई दोस्त नहीं था।
- दोस्त शब्द से तभी से नफरत होने लगी, जब बचपन में लड़के मुझे काला कलूटा कहते थे। मेरे केवल वर्चुअल फ्रेंड्स ही हैं।
- उदयन ने पुलिस से कहा कि उसकी करीब 100 फेसबुक प्रोफाइल हैं। वह एक प्रोफाइल से कोई फोटो अपलोड करता था और अपनी दूसरी प्रोफाइल से उस तस्वीर को लाइक करता था।
- ऐसा केवल ये दर्शाने के लिए कि सोशल मीडिया पर उसकी फैन फॉलोइंग काफी ज्यादा है।
- सख्ती के बाद भी वह जो बताता था उसमें ज्यादातर बातें झूठ निकलती थीं। मसलन उसे अमेरिका और दूसरे विकसित देशों के स्थानों और सड़कों के नाम जुबानी याद हैं।
- वह विदेश के गलत मोबाइल नंबर भी ऐसे बताता था, जैसे वह मोबाइल फोन धारक सही में उसका परिचित हो।
 
पेरेंट्स की हत्या का आरोप साबित होने पर प्राॅपर्टी पर हक नहीं
- उदयन का साकेत नगर स्थित 62 -3ए मकान उसके पिता वीके दास के नाम पर है। माता-पिता की मौत की पुष्टि के बाद अभी तक इस प्रापर्टी पर उनके इकलौते वारिस उदयन का ही दावा बनता है।
- सेक्शन 25 द हिन्दू सक्सेशन एक्ट के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी की हत्या करता है तो वह मरने वाले की प्रॉपर्टी का उत्तराधिकारी बन जाने हेतु डिसक्वालिफाइड हो जाएगा।
- सरल शब्दों में जब तक उदयन दास पर उसके माता पिता की हत्या का आरोप साबित नहीं हो जाता तब तक उदयन दास ही अपने माता पिता की प्रॉपर्टी का वारिस होगा।
- माता पिता की हत्या का आरोप साबित हो जाने पर एक्ट के अनुसार स्वतः: ही उसके वारिस का दावा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मृतक वीके दास के सेकंड रिलेटिव्स उस प्रॉपर्टी पर दावा पेश कर सकेंगे।