कैशलेस व्यवस्था कितनी उपयोगी, कितनी कारगर

तूलिका श्रीवास्तव।रीवा। कैशलेस व्यवस्था पर सरकार पूरा जोर दे रही है। ऐसे देश में जहां किसी तरह से तमाम लोग दो जून की रोटी जुटा पाते हैं,अपना नाम  अपनी राष्ट्रभाषा में लिखने तक में जद्दोजहद करते हैं। ऐसे में डिजिटल इकोनामी की बात कहां तक सार्थक हो पाती है यह तो भविष्य के गर्भ में है,लेकिन शहर के व्यापारी सरकार की इस मंशा को गहरे तक भांप रहे हैं। कुछ का कहना है कि यह लोगों के लिये फायदेमंद होगी तो कुछ मानते हैं कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। गुड मॉॄनग ने शहर के कुछ खुदरा व्यापार से जुड़े व्यवसाइयों से बात की:किट्टी गर्ल के संचालक श्याम गंगवानी का कहना है कि मेरे हिसाब से छोटे व्यापारियों के लिये सरल बनाना चाहिये,जैसे बिल की फार्मेलिटी कम हो,बिल न पूछा जाय कि है कि नहीं या यह ध्यान रखें कि जीएसटी लागू हो। कम्प्यूटर प्लाजा की संचालिका  रंजना चतुर्वेदी का मानना है कि कैशलेस व्यवस्था फिलहाल व्यवहार में आने में वक्त लगेगा। ऐसा लगता है कि यह इतना बड़ा निर्णय है कि यह कुछ संभाव होने के लिए ही लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे सभी को फायदा होगा और सबको इसका समर्थन करना चाहिए। स्पर्श गल्र्स कलेक्शन के सुमित कहते हैं कैशलेस व्यवस्था एक तरह से सही ही है। हां इतना जरूर है कि कैश पेमेंट की थोड़ी दिक्कत जरूर पर आगे हम सब मिलकर कोशिश करेंगे तो कैशलेस इंडिया जरूर बन जायेगा। गल्र्स जोन के सनी दुर्गिया का अन्य लोगों से विपरीत मानना है कि देश पूरी तरह से कैशलेस नहीं हो सकता है। साथ ही इस कारण खुदरा व्यवसाइयों को दिक्कत हो रही है। कैश से जेब से गरम रहती है कार्ड से नहीं।   भगवान दास ज्वेलर्स के संचालक रमेश कुमार सोनी मानना है कि यह साक्षरता के लिये अच्छा है। हमारे यहां पढ़े लिखे लोग आते हैं तो हमें फायदा है। मध्यम अपर वर्गीय लोगों के लिये कैशलेस व्यवहार फायदेमंद है। लिमिटेड लोगों के हाथ में बागडोर होगी। एसी सेंकड क्लास वाले फस्र्ट क्लास में सफर करेंगे।  जयपुरिया ज्वेलर्स के संचालक गौरव मिश्रा का कहना है कि कैशलेस व्यवस्था के अंतर्गत हम कहीं से भी ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। यह काफी अच्छा होने की उम्मीद है। बिजनसे में कुछ परेशानी तो आती है लेकिन समझने के बाद सब कुछ ठीक हो जाता है। मेरा तो मानना है कि यदि यह थोड़ा भी कारगर होता है तो अच्छा है।