रीवा। बिजली कंपनी व उसके भ्रष्ट अधिकारियों ने तो अब नियमित व  ईमानदार उपभोक्ताओं को ही प्रताडि़त करना शुरू कर दिया है। जिन उपभोक्ताओं के जमा होने वाले धन से इन्हें वेतन मिलता है उन्ही उपभोक्ता को तरह-तरह से फंसाने की कोशिश की जा रही है, कभी लोड चेकिंग के नाम पर तो कभी औसत बिल व मनमानी बिलों के नाम पर शोषण करने का प्रयास किया जा रहा है। इतना ही नहीं यदि कोई ईमानदार उपभोक्ता बिजली कंपनी से अपनी संस्था के लिये नई लाईन व नये कनेक्शन की मांग करता है तो भ्रष्ट अधिकारी फिर उसके खिलाफ षडय़ंत्रपूर्वक फंसाने की कार्यवाही शुरू कर देते हैं और लाखों की बकाया राशि निकाल कर फिर ब्लैकमेल करने की कोशिश की जाती है। विद्युत वितरण केन्द्र बैंकुण्ठपुर का एक ऐसा ही मामला स्वाती सिंह तेंदुन के नाम पर लिये गये कनेक्शन का प्रकाश में आया है जहां भ्रष्ट जे.ई. आर.के. तिवारी को मोटी रकम न मिलने पर वहां के एक शैक्षणिक संस्था के खिलाफ लोड चेकिंग के नाम पर पिछले 6 महीने का अतिरिक्त चार्ज जोड़कर 1 लाख 20 हजार का बोगस बिल जारी कर दिया। जब इसकी शिकायत संस्था की ओर से कार्यपालन यंत्री को की गई और वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया तो वही विद्युत बिल 58154 रूपये मान्य किया गया। जिसे उपभोक्ता द्वारा जमा करवा दिया गया। बावजूद इसके अभी जे.ई. आर.के. तिवारी की कुदृष्टि उपभोक्ता व संस्था पर लगी हुई है। बताया गया है कि संस्था व उपभोक्ता को फंसाने और बदनाम करने तथा छवि धूमिल करने की नीयत से जे.ई. आर.के तिवारी ने तरह-तरह के हथकण्डों का प्रयोग किया। पुराने कनेक्शन का विद्युत मीटर जलने के बाद कई बार लिखित व मौखिक रूप से आवेदन करने के बाद भी मीटर नहीं बदला गया। जहां पुराने बिलों के आधार पर औसत खपत के आधार पर प्रतिमाह 320 यूनिट का बिल जारी होता था तथा उपभोक्ता द्वारा बिल की आदायगी भी की जा रही थी, किन्तु जे.ई. आर.के. तिवारी लोड चेकिंग के दौरान स्वीकृत भार से संयोजित भार अधिक होने का फर्जी पंचनामा तैयार कर 2539 यूनिट प्रतिमाह का पिछले छ: माह मार्च से अगस्त 2016 तक का जो औसत दर तैयार किया है उसके चलते संस्था को अब आठ गुना अधिक बिल एवरेज के आधार पर आ रहा है। जिससे प्रतिमाह संस्था/उपभोक्ता को 20 हजार की चपत बिजली कंपनी के जेई के भ्रष्ट आचरण से भुगतनी पड़ रही है। जो कि अब फिर से 01 लाख रुपये की बिलिंग हो गई है, अगस्त 2016 से दिसम्बर 2016 के दरमियान। 

लोड चेकिंग के नाम पर बढ़ा दिया 8 गुना बिल

उपभोक्ता स्वाति सिंह के मुताबिक संस्था ने जब नये भवन का निर्माण करवाया तो उसके लिये नयी लाईन व नये कनेक्शन की मांग की। नई लाईन के लिये स्टीमेट भी तैयार करवाया किन्तु संस्था को न तो नया कनेक्शन ही दिया गया और न ही नवीन लाईन ही खींची गई। वस्तुस्थिति ये भी है कि संस्था को अभी तक ग्रामीण फीडर से बिजली दी जा रही थी। जबकि मांग की गई थी बैकुण्ठपुर कस्बे की लाईन से कनेक्शन की  किन्तु उस लाईन में अधिक लोड होने का बहाना करके कनेक्शन नहीं दिया गया। इसके बाद जब नयी लाईन की मांग की गई और स्टीमेट तक तैयार करवाया गया तो नई लाईन भी नहीं खींची गई। बर्षोंं से खराब मीटर को बदलने और नया मीटर लगाने के संबंध में भी कई बार लिखित व मौखिक निवेदन किया गया किन्तु जे.ई. आर.के. तिवारी की मनमानी से नया मीटर भी नहीं लगाया गया। मजे की बात ये भी है कि संस्था के जिस नवीन भवन के आधार पर अतिरिक्त लोड होने का फर्जी  पंचनामा तैयार किया गया था उस समय पर वहां न तो शिक्षण कार्य प्रारंभ हुआ था न ही भवन में विद्युतीकरण हो पाया था। बावजूद इसके जेई ने मनमानी करते हुये पूर्व से आ रहे औसत बिल को 8 गुना अधिक बताकर पिछले 6 महीने पूर्व से 2539 यूनिट प्रतिमाह के हिसाद से ओवर लोडिंग की बिलिंग कर दी।

नहीं बदला गया जला हुआ मीटर

जेई की मनमानी कार्यवाही के बाद और अपीलीय अधिकारी कार्यपालन यंत्री द्वारा 1 लाख 20 हजार के बिल को 58 हजार करने के बाद जब उसे उपभोक्ता द्वारा जमा कर दिया गया तब भी संस्था की ओर से कई बार कहने के बाद भी जला हुआ मीटर नहीं बदला गया। अंतत: 09 दिसम्बर 2016 को उपभोक्ता द्वारा दवाब बनाने के बाद जला हुआ मीटर बदला गया । अब मीटर खुद बतायेगा कि खपत कितनी है, आकलन बिल यदि वास्तविक बिल से कम आता है तो इसके लिये जिम्मेदार जेई आरके तिवारी के खिलाफ उपभोक्ता कार्यवाही के लिये बाध्य हो सकती है। इसके अलावा जेई की ही मनमानी के चलते नयी लाईन भी नहीं दी जा रही है, जबकि स्टीमेट तैयार हो चुका है और संस्था इसके लिये तैयार भी है। बावजूद इसके जेई लगातार बेईमानी पर आमादा है। इसके पहले भी कई जेई यहां पदस्थ हो चुके हैं, उन्हें भी इस संस्था के बारे में ज्ञान था किन्तु किसी ने इस तरह की द्वेषपूर्ण कार्यवाही कभी नहीं की जैसा कि जे.ई. आर.के. तिवारी ने किया।

मनमानी दिया गया बिल

दिलचस्प बात यह है हि संस्था का ओवरलोड चालान करने के पूर्व 29 अगस्त 2016 को बिल में 2539 यूनिट का चार्ज पहले ही जोड़ दिया गया था, बिजली का बिल इस बात का प्रमाण है। जबकि लोड चेंकिग का चालान 31 अगस्त 16 को बनाया गया उस समय भी 2539 यूनिट की ही खपत दिखाने का अर्थ है कि जेई पहले से ही 2539 यूनिट का मनमानी बिल देने का मन बना रखा था। अब सवाल ये भी पैदा होता है कि जेई को कैसे पता था कि लोड चेंकिग के पूर्व 2539 यूनिट की औसत खपत आयेगी। ये भी सही है कि मीटर मकान से 500 मीटर दूर ट्रांसफार्मर के पास लगा हुआ है। वहां पर अन्य 03 उपभोक्ताओं के भी मीटर लगे हुये हैं। सभी के मीटर जले हैं, अन्य तीन उपभोक्ताओ के न तो चालान किये गये और न ही जले हुये मीटर बदले गये,किन्तु कार्यवाही का केवल एक उपभोक्ता के खिलाफ होने का अर्थ है कि दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही की गई है। 31 अगस्त 2016 को ओवरलोड का चालान किया गया उसके बाद भी 04 महीने तक मीटर नहीं बदला गया। अंत में 9 दिसमबर 16 को मीटर बदला गया। इस तरह से उपभोक्ता को प्रताडि़त किया गया है। सेमरिया फीडर ग्रमीण फीडर है जहां दिन में कार्यालयीन समय पर कभी लाईट रहती ही नहीं रात्रि में संस्था में ताला ही बंद रहता है। ऐसी स्थिति में भी 2539 यूनिट का औसत बिल पूर्व मे 06 माह तथा अगस्त से दिसम्बर 2016 अर्थात मार्च 2016 से दिसम्बर 16 तक प्रतिमाह समझ से परे है।