बस स्टैंड की जमीन को बिल्डर के चंगुल से बचाने कविता पांडे आगे आ गयी है जिसमे उन्हें अन्य लोगों के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित चन्द्रकान्त शुक्ल का भी साथ मिल गया है। रीवा के बस स्टैंड के व्यापारियों के साथ कविता पांडे ने नजूल अधिकारी और एस डी एम को लिखित सामूहिक आपत्तियां प्रस्तुत की 
बिल्डर्स को फायदा पहुँचाने की जल्दी में नगर निगम ने एक ऐसा प्रस्ताव शाशन के पास भेज दिया ,जिसका वह स्वामी ही नहीं था। मामला रेवांचल बस स्टैंड की भूमि का है जिस पर बिल्डर की आँखे गड़ी हुई है ,सत्ता के नजदीक माने जाने वाले बिल्डर को खुश करने के लिए यहाँ से बाकायदा प्रस्ताव बनाकर शाशन को भेज दिया गया था ,जिसे इसलिए वापस कर दिया गया कि रेवांचल बस स्टैंड की जमीन का मालिक नगर निगम नहीं है बल्कि राजस्व रिकार्ड में अभी भी यह भूमि नजूल के नाम है। 
              नजूल रीवा की खसरा नंबर ४३५ एक किता का अंश रकबा १.६९ एकड़ की भूमि को नगर निगम के कर्ता धर्ता बिल्डर को फायदा पहुचाने की नियत से इसका प्रस्ताव   शाशन को भेज चुके है जो की आपत्ति के साथ वापस लौट आया है ,अब अपनी गल्ती छुपाने के लिए  नजूल अधिकारी के सामने इसका व्यावसायिक प्रयोजन का उद्देश्य बताकर स्थायी लीज हेतु आवेदन दिया है ,जिसके सन्दर्भ में नजूल अधिकारी द्वारा लोगो से आपत्तियां आमंत्रित की गयी है। 
       मध्य प्रदेश वाहन कर्मचारी संघ के अध्यछ वीरेन्द्र प्रताप सिंह बताते है की पहली बात तो यह है कि यह भूमि अभी सार्वजनिक प्रयोजन में है और इसका व्यावसायिक प्रयोजन में परिवर्तन जनहित में  उचित नहीं होगा ,दूसरी बात यह है कि अगर नगर निगम इसका स्वत्व नहीं रखता था तो उसने किस आधार पर इसमे बस स्टैंड बनाकर दो सौ के आस पास लोगो को किराये पर उठा रखा था तीसरी बात यह है की एक बिल्डर को फायदा पहुचने के लिए हजारों लोगो की रोजी रोटी से खिलवाड़ कहाँ तक उचित है क्योंकि एक दुकान से चार पांच लोगो के परिवार चलते है ,नगर निगम जहाँ बस स्टैंड ले जाना चाहता है वहां तो अभी दस बीस साल व्यवसाय चलना बहुत मुश्किल है ,साथ ही अभी बस स्टैंड शहर के बीच में है ,दूर हो जाने से लोगो को भी असुविधा होगी