बाढ़ के बहाने ही सही एक सरकारी योजना के लिए जिसमे नदी किनारे पैदल चले वालो के लिए पथ वे बनाया जाना है और उसके बदले बिल्डर की खन्ना चौराहे के पास स्थित जर्जर मकानों की जगह देना है ,अब नदी के किनारे बसने  वालों पर कहर टूटना तय है वैसे तो यह आसान न होता क्योंकि नदी किनारे लोगो ने घर बना लिए थे पर प्रशाशन को एक बहाना मिल गया है .और विकास पुरुष और बिल्डर की योजना कामयाब होती दिख रही है 

शहर में आई बाढ़ और इससे मची भीषण तबाही को लेकर हुए मंथन में निकल कर सामने आए तथ्य जिला प्रशासन और नगर निगम के दामन को ही दागदार करते नजर आ रहे हैं। दरअसल नदी तट से 30 मीटर तक का क्षेत्रफल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की गाइड लाइन के अनुसार ग्रीन बेल्ट माना जाता है। जहां किसी भी तरह के निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती। जबकि बिछिया और बीहर के ग्रीन बेल्ट एरिया में सैकड़ों की तादाद में इमारतें खड़ी हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा क्षति भी यहीं हुई है। जाहिर है कॉलोनाइजरों से साठगांठ कर नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ही उन्हें नियम विरूद्घ तरीके से अनुमति दी है। जिला प्रशासन ने अब शहर को बाढ़ से बचाने की कार्ययोजना बनाने के साथ ऐसे अफसरों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई का भी मन बना लिया है। साथ ही बीहर और बिछिया नदी के किनारों से निर्माण भी हटाए जाएंगे।

कॉलोनाइजर-अफसरों पर गिरेगी गाज

प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार एनजीटी के दबाव देने के बाद जिला प्रशासन बिछिया और बीहर नदी के तटों पर हुए अतिक्रमण को हटाने को लेकर गंभीर हो गया है। बीहर नदी के दोनों तरफ गलत तरीके से जमीन का क्रय-विक्रय कर प्लाटिंग कर दी गई। इस पूरे मामले में नगर निगम के उन अधिकारियों पर गाज गिर सकती है जिन्होंने निर्माण के लिए अनुमति दी थी। इसके साथ ही कॉलोनाइजरों पर भी प्रशासन की नजर है। उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।

यह बनाई है कार्ययोजना

शहरवासियों को बीहर और बिछिया नदी से आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए बीहर नदी में आने वाले पानी को नियंत्रित किया जाएगा। इसके लिए लिलजी बांध की मरम्मत कराई जाएगी। बांध के टूटे गेट सहित अन्य रिपेयरिंग के कार्य कराए जाएंगे जिससे बारिश का पानी बांध में रोककर जरूरत के हिसाब से छोड़ा जा सके। इसी तरह फसई बांध का पानी बिछिया नदी में पहुंचता है। इस बांध को लेकर भी प्रशासन ने कार्ययोजना बनाई है। इसके साथ ही बीहर और बिछिया नदी के दोनों पाटों पर 30-30 फीट तक अतिक्रमण हटाकर नदी का गहरीकरण किया जाएगा। जिससे बारिश के समय नदी का पानी फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके।

सर्वे टीम में इनको रखा गया

प्रशासन ने कार्ययोजना बना सर्वे टीम गठित की है। जिसमें जल संसाधन विभाग, मौसम विज्ञान केन्द्र के अधिकारी, नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जबकि एनजीटी के पत्र के बाद जिला प्रशासन ने नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सहित तीन सदस्यीय टीम भी गठित की है। यह दल बीहर और बिछिया नदी के तटों का भ्रमण कर कार्ययोजना बना रहा है। सर्वे कार्य पूरा होते ही उसे अमली जामा पहनाया जाएगा।

एक साल पहले हुई थी शिकायत

शहर में आने वाली बाढ़ को लेकर एक साल पहले सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने एनजीटी व जिला प्रशासन को पत्र लिखकर सचेत किया था। साथ ही कार्ययोजना बनाने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। बाढ़ आने के बाद एनजीटी ने जब नाराजगी जताई तब प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार की है।

चौथी बार शहर ने झेली बाढ़

जानकारी के मुताबिक बीते 19 साल में शहरवासियों ने चौथी बार बाढ़ त्रासदी झेली है। इसमें से 1997 और 2016 में बाढ़ की बड़ी विभीषिका झेली। जबकि 2005 और 2007 में बाढ़ का आंशिक असर था। बाढ़ के चलते शहर के दर्जनों मोहल्लों के हजारों परिवारों की गृहस्थी खराब हो गई। प्रशासन द्वारा बनाई गई कार्ययोजना पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। ईको पार्क व मुकुंदपुर टाइगर सफारी प्रोजेक्ट इसके उदाहरण हैं।

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शहर को बाढ़ से बचाने के लिए कम्पलीट कार्ययोजना बनाई गई है। सर्वे का कार्य भी किया जा रहा है। नदी के आस-पास अतिक्रमण हटाना भी इसका एक पार्ट है। इसके लिए जो भी दोषी होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी। लिलजी बांध व फसई बांध की मरम्मत की योजना बनाई गई है। दोनों बांधों से बीहर, बिछिया नदी में पानी आता है।

-राहुल जैन, कलेक्टर, रीवा।