राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान २००५ से लेकर आज तक तमाम कई सरकारी जनकल्याणकारी योजनायें चलाई गई जिसके बावजूद भी राज्य में आज भी राज्य की कुल आबादी के ८० प्रतिशत से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर हैं, इस तरह का आरोप कोई विपक्षी नेता का नहीं बल्कि प्रदेश में भुखमरी और गरीब लोगों की हालत का बखान खुद ही राज्य सरकार के उन आंकड़ों के द्वारा होता है, जिसमें राज्य की कुल सात करोड़ २३ लाख में से पांच करोड़ ४४ लाख लोगों को यही शिवराज सरकार एक रुपये किलो गेहूं और चावल इसलिये दे रही है कि वह अपने और अपने परिवार की भूख मिटा सके, इसी सबके बीच कल मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में आनंद विभाग का गठन किया? इस मंत्रालय का प्रदेश में प्रारम्भ करने के पीछे शिवराज सिंह की मंशा और योजना क्या है यह वही जानें लेकिन मध्यप्रदेश की शिवराज कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और बकौल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक तरफ दुनिया में सुख-सुविधायें बढ़ रही हैं, दूसरी ओर मनुष्य के जीवन में आनन्द का अभाव होता जा रहा है, यह सोचकर दुख होता है कि असहिष्णुता, हिंसा, निराशा, अवसात, आत्महत्यायें जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां बढ़ती जा रही हैं, तो वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यह मानते हैं कि प्रतिष्ठा और पैसा आनंद का पैमाना नहीं होता कई पद वाले निराश हैं और कई पैसे वाले निराश हैं, इस बात को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने आनंद विभाग का गठन किया। इस मंत्रालय के गठन की अवधारणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की स्वयं की उपज है और इसी के चलते इस विभाग का गठन किया गया, लेकिन इस संबंध में लोगों की यह धारण है कि जिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिमाग की उपज यह आनंद विभाग है उस उपज को मूर्त रूप देने वाले शिवराज सिंह चौहान स्वयं कांटों भरी राह पर चलते हुए चौहान निष्कंटक राज्य तो कर रहे हैं लेकिन डम्पर और व्यापमं जैसे कांटे शिवराज सिंह का दर्द भी बढ़ा रहे हैं, उन्हें निराश भी कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जो स्वयं दर्द और निराशा में जी रहा है वो प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता आनंद कैसे दिला पाएगा, डर और निराशा इसलिये कि राष्ट्रीय स्तर पर शिवराज सिंह चौहान के सीएम पद से छुट्टी देने की सहमति बन गई है और किसी भी दिन, किसी भी क्षण उनसे स्तीफा लिया जा सकता है? अब चूंकि आनन्द विभाग शिवराज क ो शिवराज के आधीन ही रहना है तो हम और प्रदेश की साढ़े सात करोड़ की जनता की ओर से यह प्रार्थना करते हैं कि हमें कष्ट देने वाले को, हमें छलने वाले और हमारे बच्चों को व्यापमं की मौत का निवाला बनाने वालों को ईश्वर कुछ दिन और आनंद में जीने का अवसर प्रदान करे, बस गुजारिश इतनी है कि थोड़ा है, साल ज्यादा न हों ? कुल मिलाकर राज्य में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रारम्भ किये गये आनंद विभाग का कार्य क्या होगा, इससे किसको लाभ होगा और यह आनंद मंत्रालय किस तरह से जनता से जुड़ेगा, आनंद विभाग के गठन के बाद इस प्रदेश से सभी तरह की समस्यायें जिनसे इस स्वर्णिम मध्यप्रदेश के राज्य में प्रदेश की हावी और भ्रष्ट नौकरशाही से जूझ रही है अब उससे मुक्ति मिल जाएगी, क्या इस विभाग के गठन के बाद अब राज्य का कोई अधिकारी बिना लक्ष्मी दर्शन के आम जनता का काम करता दिखाई देगा? क्या पटवारी, गिरदावर और राजस्व विभाग से जुड़े लोग अब किसानों का काम बिना भजकलदारम् के सरलता से करते दिखाई देंगे ? तो वहीं जो किसान आज सरकारी गलत नीतियों के चलते मौत को गले लगा रहे हैं अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे? क्या राज्य के उन नौनिहालों जो कुपोषण के शिकार हैं जिनके मुंह से निवाला छीनने का काम राज्य में सक्रिय कुपोषण आहार के ठेकेदार, पत्रकार और आईएएस अधिकारियों के रैकेट के द्वारा जो छीना जा रहा था अब उन नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को उनका हक मिलेगा। क्या राज्य में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण इस स्वर्णिम मध्यप्रदेश की धरती पर पैदा होने वाले बच्चे जो कि अपने साथ तमाम बीमारियां लेकर इस धरा पर आ रहे हैं ? क्या अब प्रदेश का माहौल प्रदूषणमुक्त हो जाएगा और राज्य की आबो-हवा स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त बहेगी ? इस तरह के तमाम सवाल इस आनंद विभाग के गठन के बाद लोगों के दिलो दिमाग में चल रहे हैं और लोग इस आनंद विभाग के गठन को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं आखिर इस मंत्रालय के गठन के बाद क्या अब सच में मध्यप्रदेश की जनता आनंद की अनुभूति करेगी? 

Source ¦¦ हिन्द न्यूज सर्विस