पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीती में हर जगह कमजोर पड़ती दिख रही कांग्रेस उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं और पार्टी ने इसकी जिम्मेदारी पहले ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को सौंप दी हैं। कांग्रेस को प्रशांत से उम्मीद हैं की वे पार्टी के लिए कोई बेहतर रणनीति बनायेंगे।

प्रशांत किशोर ने भी उत्तरप्रदेश के लिए अपनी योजना लगभग बना ली हैं और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया है की उत्तरप्रदेश में अगला मुख्यमंत्री कांग्रेस का ही होगा। इसके लिए उन्होंने पूरी हाईटेक योजना बना ली है। प्रशांत किशोर का कहना है कि अगले 15 दिन में कांग्रेस इस तरह का प्रचार करेगी जो पिछले 20-25 साल में किसी ने नहीं देखा।

राय बरेली, अमेठी, सुल्‍तानपुर और लखनऊ डिवीजन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस टिकट के लिए 9000 एप्‍लीकेशन आए हैं। 812 ब्‍लॉक में से पार्टी कार्यकर्ताओं ने 400 जगहों पर दफ्तर खोल लिए हैं। उन्‍होंने कहा कि इस स्‍पेशल प्रचार की तैयारियां उन्‍होंने नहीं बल्कि कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने की है।

किशोर ने कहा कि पार्टी को पता है कि पिछले 27 साल से वह सत्‍ता में नहीं है इसके कारण स्रोत की कमी हो सकती है। लेकिन जिला यूनिटों को स्रोत का जिम्‍मा दिया जाएगा। किशोर ने नेताओं को याद दिलाया कि पार्टी टिकट चाहने वाले हरेक‍ नेता को अपने विधानसभा क्षेत्र में हर बूथ से कम से कम एक कार्यकर्ता का नाम देना होगा। ऐसा नहीं करने पर टिकट नहीं मिलेगी।

प्रशांत किशोर ने हर विधानसभा क्षेत्र में 20-20 तेजतर्रार कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने का इरादा बनाया है। बूथ स्तर तक सक्रियता बरत सकने वाले इन कार्यकर्ताओं को सीयूजी ग्रुप से जोड़कर सूचना तंत्र मजबूत किया जाएगा। जानकार बताते हैं कि पीके की मंशा हर विधानसभा क्षेत्र की जमीनी हकीकत जानना है। राजनीतिक इतिहास के साथ भौगोलिक परिवेश, धर्म और जाति से जुड़ी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही कांग्रेस उम्मीदवार तय करेगी। इसके लिए पारंपरिक सांगठनिक पदाधिकारियों की राय तक सीमित रहने की बजाय वह जमीनी सक्रियता बनाए रखने वालों से सीधे संपर्क के इच्छुक हैं।