बुद्ध तो तृष्णा पार कर गए, आम्रपाली भी मोक्ष के द्वार पर पहुँच गयी लेकिन अन्य भिक्षुक आज भी वहीँ खड़े हैं..!! तृष्णा अब भी उनके साथ खड़ी है..!!!

Source ¦¦ पंकज पाठक प्रजाताज के संपादक है ,आजकल वे अध्यात्म को आपने नजरिए से प्रस्तुत कर रहे है