आईएएस में 109वीं रैंक हासिल करने वाले ध्रुव मिश्र से बातचीत 

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोगों को एंड्राइड फ़ोन और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए

रीवा। कोई लक्ष्य बड़ा नहीं होता, कोई ख्वाहिश छोटी नहीं होती- अगर हम ठान लें। यह बात रीवा जिले के हनुमना ब्लॉक स्थित ग्राम कोलहा के ध्रुव मिश्र ने कही। हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा में 109वीं रैंक हासिल कर समूचे देश में विंध्य अंचल का नाम रोशन करने वाले ध्रुव मिश्र मंगलवार को रीवा शहर स्थित मोशन कोचिंग में www.goodmorningnation.com से बातचीत कर रहे थे।  ध्रुव ने बताया कि उनके प्रेरणास्रोत उनके पिता बीपी मिश्र हैं, जो खुद भी सिविल सर्विस परीक्षा में चयनित होकर रक्षा मंत्रालय में बतौर डीजीएम कार्यरत हैं। 

सिर्फ एक वर्ष ली कोचिंग

आईएएस चयनित ध्रुव मिश्र ने बताया कि उन्होंने जबलपुर स्थित केन्द्रीय विद्यालय से हाई स्कूल की परीक्षा और 12वीं की परीक्षा जबलपुर के ही महर्षि विद्या मंदिर से पास की। इसके बाद बीएचयू से आईआईटी किया। तत्पश्चात एमडीआई गुडग़ांव से एमबीए किया और सिविल सर्विसेज की तैयारी में लग गए। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने दिल्ली में एक वर्ष कोचिंग भी ली और इस वर्ष वे जबलपुर स्थित अपने घर में रहकर ही तैयारी कर रहे थे और इस वर्ष रीवा में मोशन कोचिंग की शुरूआत भी की ताकि यहां के बच्चों को आईआईटी-पीएमटी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा जैसे शहरों में न भटकना पड़े। 

धैर्य बनाए रखें

ध्रुव मिश्र ने बातचीत में कहा कि हर व्यक्ति को अपने प्रतिभा पहचाननी चाहिए और अपनी मेहनत तथा ईमानदारी पर भरोसा रखना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर हाल में धैर्य बनाएं रखें। शुरूआत में हो सकता है कि आप थोड़ा लडख़ड़ा जाएं पर हमेशा अपना लक्ष्य याद रखें। सफलता निश्चित मिलेगी। ध्रुव ने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोगों को एंड्राइड फ़ोन और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए। अध्ययन के साथ ही ध्रुव की खेल और संगीत में भी खासी रूचि है। ध्रुव ने संगीत में डिप्लोमा भी लिया है और बैडमिंटन में स्टेट भी खेल चुके हैं। ध्रुव के छोटे भाई ऋषभ आईआईटी के छात्र हैं।

Source ¦¦ Goodmorningnation.com से साभार