भोपाल। राजधानी में सोमवार शाम को परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने युवाओं ने आरक्षण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वे पोस्टर लेकर मंच की तरफ बढ़ रहे थे। करीब 7 मिनट हुई इस नारेबाजी से नाराज होकर सीएम कार्यक्रम से वापस लौट गए। युवाओं की नारेबाजी को उग्र होते देख समाज के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने युवाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन युवा नहीं माने। हालांकि, मुख्यमंत्री के जाने के बाद वे खुद शांत हो गए।

दरअसल,पांच नंबर स्थित भगवान परशुराम मंदिर में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने परशुराम के जन्मोत्सव पर बुधवार से शुरू हुए कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभा का आयोजन किया था। इस आयोजन में बताया गया कि भेल दशहरा मैदान गोविंदपुरा से बुधवार को शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में 101 घोड़े, 51 बग्गी, फरसे के साथ 21 फीट की भगवान परशुराम की प्रतिमा, 52 डोल शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र थे। शोभायात्रा में 51 कन्याओं को शक्ति का रूप धारण कर बग्गियों में बैठाया गया था। यात्रा में घोड़े पर धर्मगुरु पं. रामजीवन दुबे समेत साधु-संत सवार थे।

समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा व महिला प्रदेश अध्यक्ष रीता मिश्रा ने बताया कि शोभायात्रा अन्नाा नगर, ज्योति टाकीज, प्रगति चौराहा, बीजेपी कार्यालय होते हुए पांच नंबर स्थित भगवान परशुराम मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इस अवसर पर सभा का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी आने वाले समाज के लोगों के ठहरने के लिए भवन की सौगात देने का आश्वासन दिया। इस मौके पर महापौर आलोक शर्मा, विधायक नारायण त्रिपाठी, भाजपा प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय त्रिपाठी, प्रज्ञा भारती समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।

कांग्रेस के कार्यकर्ता थे हंगामा करने वाले : वीडी शर्मा

मंच पर मौजूद भाजपा के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री जब अपना संबोधन समाप्त कर वापस लौट रहे थे और मौजूद लोगों के साथ फोटो खिंचवा रहे थे तब कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उनके हाथ में तिरंगा था जो आरक्षण के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे। ये लोग कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद थे। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने घटना पर कहा कि भाजपा कार्यकर्ता दोहरे मापदंड अपना रहे हैं। कोई भी मामला हो कांग्रेस पर ही दोषारोपण किया जाता है। भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए की वह आरएसएस की आरक्षण विरोधी विचारधारा के खिलाफ है या समर्थन में।