चल दिए दे के गम...
 
  

 
 
सतना के मशहूर शेरे-पंजाब ज्वेलर्स के मालिक श्री संजय वर्मा क्या वास्तव में देश छोड़ कर चले गए हैं ? देश छोड़ा हो या न छोड़ा हो पर सतना छोड़ कर तो चले ही गए हैं ! उनके शुभचिंतकों सहित शहर के सारे लोग स्तब्ध हैं !  कुछ बड़े परेशान है कि हमसे उधार लिए था, अप्रैल के फस्ट वीक में वापस मिलना था ! तगादा करते कि उसके पहले ही संजू भैया मय-जनबच्चे से निकल लिए ! कुछ मजे भी ले रहे हैं ! एक बोला कि सतना का नीरव मोदी भी गया !
 
खैर ! संजय वर्मा नीरव के सामने तो कुछ नहीं पर सतना में एक हैसियत रखते थे ! उनके शोरूम में सौ से अधिक कर्मचारी हैं ! उनका सोने-चांदी, हीरा-जवाहरातों का पुश्तैनी व्यापार है ! उनके पिता रामावतार वर्मा की सन 2002 में हत्या हो गई थी ! उस रात घर में लूट भी हुई थी ! लेकिन पिता की मृत्यु के बाद संजय और राजीव दोनों भाइयों ने अपने सोने-चांदी के व्यवसाय को बखूबी सम्हाल लिया था ! पहले इनकी दुकान चौक बाजार में थी जिसे दोनों भाई बड़े रूप में रीवा-पन्ना रोड में ले आये ! शेरे-पंजाब ज्वेलर्स सतना की एक बहुत बड़ी दुकान बन गई जिसके सामने बड़ा फव्वारा चलता था ! शोरूम के ऊपर बने मकान में संजय रहने लगे !
 
इनके सामने इनके चाचा सतीश वर्मा की दुकान गोल्ड पैलेस ज्वेलर्स है ! सतीश वर्मा की अभी हाल मृत्यु हो गई तो शोक में चाचा-भतीजों दोनों की दुकानें बंद हुईं ! शोक के पांच-सात दिन निकल गए तो चाचा की दुकान तो खुल गई मगर भतीजों की नहीं खुली ! लोगों को आश्चर्य हुआ कि जिनके शोक में दुकान बंद हुई थी उनकी तो खुल गई पर इनको क्या हुआ !? कुछ लोगों ने फोन लगाये तो मोबाइल बंद मिले ! निवास भी बंद था ! गार्डों ने बताया कि बाहर गए हैं ! दोनों भाई परिवार सहित कहाँ गए, किसी को पता नहीं !
 
पूरे शहर में जंगल की आग जैसी बात फ़ैल गई कि शेरे-पंजाब भाग लिया ! व्हाट्सअप में खबरें चल पड़ीं कि एक मशहूर ज्वेलर्स सौ करोड़ से अधिक का खेल खेलकर सपरिवार गायब ! कहते हैं कि इन पर बैंकों और साहूकारों का बहुत ज्यादा कर्ज हो गया था ! कोई कहता है कि दो-ढाई सौ करोड़ से अधिक का खेल हुआ है ! जो भी हो ! सच्चाई तो शायद ही कभी बाहर आये ! 
 
इतना अवश्य कहूँगा कि दोनों भाई पिता की तरह उदार-ह्रदय व्यक्ति थे ! खर्चा खुल कर करते थे और  पत्रकार, नेता कोई भी मांगने जाता था तो तुरंत देते और चाय पिलाते थे ! उनका शो-रूम सतना की शान था, जो अब बंद बहुत बुरा लग रहा है ! पता नहीं क्यों मुझे लगता है कि संजय भाई कुछ दिनों बाद लौट आयेंगे और कहेंगे कि- "यूँ ही हांगकांग घूमने चला गया था, निरंजन भाई  !"
 
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Source ¦¦ Fb से साभार