नरसिंहपुर। जिले का सडूमर गांव जहां गांव की बेटियों को गांव के बाहर जाकर पढ़ाई करने की बात सोचना भी मुश्किल था। उस गांव की एक बेटी ने जब आठवीं के बाद पढ़ने बाहर जाने की जिद की और मामा का साथ मिला तो आज वही बेटी न केवल गांव की सरपंच है बल्कि वह दूसरी बेटियों के लिए भी मिसाल बन चुकी है जो अब पुणे में देश के उपराष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होगी।mona kaurav narsinghpur 2018118 143936 18 01 2018

 

सड़ूमर गांव में बेटियों की पढ़ाई आठवीं के बाद बंद हो जाती थी। लोग नहीं चाहते थे कि उनकी बेटिया दूसरे गांव जाकर पढ़ाई करें। लेकिन वर्ष 2011-12 में जब ननिहाल में रहते हुए एक बेटी मोना कौरव ने आगे पढ़ने की जिद की और उनके मामा राव विक्रम सिंह ने उसे हौसला देते हुए गांव से 7-8 किमी दूर कौड़िया कन्या स्कूल में कक्षा नवमीं में दाखिला दिला दिया। जबकि मोना के साथ पढ़ने वाली अन्य लड़कियां घर बैठ गईं। गांव से रोज स्कूल आने-जाने उस दौरान आवागमन के साधनों का अभाव था और रास्ते में एक नाला भी पुल विहीन था तो मोना के सामने बाधाएं भी पग-पग पर थीं।

मोना बतातीं हैं कि अपने यहां कार्य करने वाले रिश्ते के मामा राधे ठाकुर के साथ साइकिल स्कूल जाने सुबह 10 बजे घर से निकलतीं, कई बार नाले में पानी ज्यादा होने से रोड पर बैठकर पानी कम होने का इंतजार किया, मामा के कांधे पर बैठकर नाला पार किया और स्कूल पहुंचे, फिर शाम को घर वापसी में यही बाधाएं आईं। जब मेरा स्कूल आना-जाना होने लगा तो गांव की 4 लड़कियों ने और स्कूल में प्रवेश करा लिया, बाद में साइकिल वितरण योजना से साइकिल मिली तो पांचों लड़कियां साइकिल से आने जाने लगीं। मोना ने बताया कि कौड़िया में 10वीं तक की पढ़ाई के बाद फिर गाडरवारा में पढ़ाई की और बाद में भोपाल के नूतन कॉलेज में प्रवेश लिया जहां से एमएससी फुड एंड न्यूट्रीशियन का कोर्स किया।

बचपन और पढ़ाई के दौरान गांव की जो हालत देखी उसकी पीड़ा भी मन में रही, गांव में विकास कार्य करने की बात सोची और लोगों को साथ मिला तो सरपंच बनी। मोना के मामा राव विक्रम सिंह कहते हैं कि जब मोना को बाहर पढ़ाने के संबंध में हमनें मोना की सहेलियों के परिजनों से बात की तो उन्होंनेे साफ कह दिया कि हम बेटियों को बाहर नहीं भेजेगें।

लेकिन हमारी और मोना की इच्छा थी कि उसकी पढ़ाई आगे हो तो हमनें हर परिस्थिति सेे लड़ने का फैसला कर लिया, आज उसके सुखद परिणाम बेटियों का भविष्य संवार रहे हैं। आज गांव से 50 से ज्यादा बेटियां गांव के बाहर स्कूल-कॉलेजों में पढ़ रहीं हैं। पुणे का फाउंडेशन देश के 5 राज्यों के उच्च शिक्षित सरपंचों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को भी सम्मानित कर रहा है।

संघर्ष से मिली यह सफलता

ग्राम सड़ूमर की सरपंच मोना कौरव एमएससी फुड एंड न्यूट्रीशियन हैं और एलएलबी कर रहीं हैं। गांव का विकास करने मोना ने कैरियर को दाव पर लगाकर महज 21 वर्ष 3 माह की उम्र में सरपंच बनकर गांव की बागडोर संभाली। प्रदेश के जनसपंर्क विभाग ने महिला सशक्तिकरण और बेटियों की सफलता को दर्शाने वाली एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई है। मोना ने गांव के 185 वर्ष पुराने तालाब का जीर्णोद्धार कराया, गांव में कई विकास कार्य भी अपनी मेहनत और लगन से कराए है। जिससे आज गांव को नई पहचान मिली है। पुरस्कार के लिए चयनित मोना को फाउंडेशन ने आमंत्रण भेजा है। इसके पूर्व मोना को जोधपुर में भी सम्मान मिल चुका है।

4 प्रदेशों से यह भी हो रहे सम्मानित

फांउडेशन द्वारा उप्र के रतसार कला से सरपंच स्मृति सिंह बीएससी एमबीए, हरियाणा के बीजोपुर सरपंच नासिर खान बीबीए, जबना चौहान थाजुन पंचायत हिमाचल प्रदेश व रितु पंदराम सरबहरा पंचायत बिलासपुर छग को भी सम्मानित कर रहा है। फाउंडेशन के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार आयोजन में उपराष्ट्रपति वैकेंया नायडू, नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, फिल्म निर्माता प्रकाश झा सहित महाराष्ट्र सरकार के कई मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधि भी बतौर अतिथि आमंत्रित किए गए है।