जबलपुर। पूर्व सीनियर आईएएस अजिता बाजपेयी पाण्डेय को मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में सदस्य (वित्त) रहने के दौरान मीटर खरीदी घोटाले में लोकायुक्त कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। 20 साल पुराने इस मामले में बरी होते हुए ही वह कोर्ट में ही रो पड़ीं। गुरुवार दोपहर 12.15 बजे लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अक्षय द्विवेदी ने कहा कि फैसला सुनाना शुरू किया। दोपहर 12.35 बजे तक फैसला सुनाया गया। इस दौरान वरिष्ठ आईएएस पूरे समय रोती रहीं।

इसके बाद वे कोर्ट से बाहर निकलीं तो महिला वकील ने उन्हें ढांढस बंधाया लेकिन आंखों से आंसू नहीं थमे। इस दौरान फोटोग्राफर ने कैमरा निकाला तो वे भड़क उठीं और हाईकोर्ट में ही वरिष्ठ अधिवक्ता के चैंबर में जा पहुंची। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि 20 सालों से घोटाले के आरोपों का बोझ झेल रही हूं। आज निजात मिली है।

पांच आरोपियों को हो चुकी है सजा लोकायुक्त कोर्ट में ट्रायल के दौरान 27 करोड़ से अधिक के मीटर खरीदी घोटाले में सीधेतौर पर जिनका दोष साबित हुआ था, उनमें तत्कालीन चेयरमैन एसके दासगुप्ता, बसंत कुमार मेहता, प्रकाश चंद मण्डलोई, मोहन चंद पंत और एनपी श्रीवास्तव को पहले ही 3-3 वर्ष का कारावास और एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा हो चुकी है। जबकि अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया के कारण श्रीमती बाजपेयी के खिलाफ विलंब से पूरक चालान पेश हुआ। जिसके बाद उन्होंने 16 जनवरी 2015 को कोर्ट के समक्ष समर्पण के बाद जमानत हासिल कर ली थी।

अजिता बाजपेयी ने ही किए थे खरीदी नोटशीट पर साइन 

1996-97 में एमपीईबी में मीटर खरीदी हुई थी। इसमें 27 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा था। उस समय एमपीईबी में सदस्य (वित्त) रहीं श्रीमती अजिता बाजपेयी ने ही खरीदी अनुमोदन की नोटशीट पर हस्ताक्षर किए थे। आरोप थे कि उन्होंने कम कीमत वाले मीटरों की खरीदी को नजर अंदाज करते हुए अधिक कीमत वाले मीटरों की खरीदी की थी। इसके बाद लोकायुक्त ने आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।