भोपाल। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद में एमडी/एमएस करने के नियम बदल दिए हैं। दाखिले के लिए राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा में अब न्यूनतम अंकों का बंधन नहीं रहेगा। मेरिट के आधार पर छात्रों को एडमिशन मिलेगा। ऐसे में प्रवेश परीक्षा में जीरो अंक लाने वाला भी मेरिट के आधार पर दाखिले का हकदार हो गया है।

देशभर के आयुर्वेद कॉलेजों में दाखिले के लिए इस साल से राष्ट्रीय स्तर पर एआईएपीजीईटी (ऑल इंडिया आयुष पोस्टग्रेजुएट इंट्रेंस टेस्ट) शुरू किया गया है। इसमें न्यूनतम अंक की अनिवार्यता हटा दी गई है। इसके पहले अनारछित वर्ग के लिए न्यूनतम अंक 50 फीसदी व एससी-एसटी के लिए 40 फीसदी व ओबीसी के लिए 45 फीसदी था। अब ऐसा बंधन नहीं है। इसका गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया गया है। आयुर्वेद से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि निजी कॉलेजों के हित में सरकार ने यह निर्णय लिया है। न्यूनतम अंक वाले उम्मीदवारों के नहीं मिलने से निजी कॉलेजों की सीटें खाली रह जाती थीं। दूसरी बात यह कि होम्योपैथी में पहले से यह न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता नहीं थी। लिहाजा एकरूपता लाने के लिए ऐसा किया गया।

प्रदेश में इतनी सीटें

प्रदेश के 3 शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में भोपाल मे 46, रीवा मे 5 व उज्जैन में 9 पीजी सीट्स हैं। साथ ही प्रदेश मे 3 निजी आयुर्वेद कॉलेजों मे कुल 78 सीट्स हैं। इतनी सीटों के लिए मप्र से हर साल करीब 2200 उम्मीदवार प्रवेश परीक्षा में बैठ रहे हैं।

आयुर्वेद कॉलेजों मे पीजी की सीटें खाली न रह जाएं, इसलिए न्यूनतम अंक की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। लेकिन, इससे पीजी कर तैयार होने वाली डॉक्टरों की क्वालिटी में फर्क आएगी। डा. राकेश पाण्डेय

राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन