पानीपत , हरियाणा क्रिकेट में तो अक्सर मैच फिक्सिंग की बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन अब टेनिस भी इससे अछूता नहीं रहा है. फिक्सिंग की इस खबर ने टेनिस जगत को हिलाकर रख दिया है.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टेनिस में पिछले 10 साल में फिक्सिंग के कई मामले सामने आए लेकिन किसी पर कोई एक्शन नहीं लिया गया. प्लेयर्स से डील टूर्नामेंट्स के दौरान होटलों के रूम में होती है.

मीडिया रिपोर्टों में दावा  किया गया है कि बीते 10 साल में 50 टॉप रैंकिंग प्लेयर्स में 16 ऐसे हैं जो कथित तौर पर मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं. इससे जुड़ी सीक्रेट फाइलें भी मौजूद जिनमें इस बात का उल्‍लेख है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इन 16 प्लेयर्स ने कई मैच पैसे लेकर हारे. इसकी जानकारी टेनिस इंटेग्रिटी यूनिट को भी है. रिपोर्ट में कहा गया है, जिन प्लेयर्स पर आरोप लगे, उनमें ग्रैंड स्लैम जीतने वाले भी शामिल हैं. लेकिन इनमें से किसी को भी खेलने से रोका नहीं गया.

यह रिपोर्ट इसलिए और अहम हो जाती है क्योंकि सोमवार से ही ग्रैंड स्लेम सीजन का पहला टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन शुरू हो रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, टेनिस की गवर्निंग बॉडी एटीपी ने 2007 में इस मामले की जांच भी की थी. जांच में पता लगा कि मैच फिक्सिंग सिंडिकेट रूस, इटली और सिसली से ऑपरेट करता है. इसमें हजारों लाखों डॉलर्स का हेरफेर होता है.

रिपोर्ट के अनुसार, विम्बलडन के भी तीन मैच फिक्स किए जा चुके हैं. हालांकि इनकी डीटेल्स नहीं दी गई है. 2008 में एटीपी ने 28 प्लेयर्स की जांच के ऑर्डर दिए थे, लेकिन इसके बाद कोई एक्शन नहीं लिया गया. 2009 में एटीपी ने एंटी करप्शन कोड बनाया, लेकिन लीगल एडवाइज लेने के बाद पुराने मामलों को दबा दिया गया.

एटीपी चीफ क्रिस करमोड आरोपों को गलत बताते हुए कहते हैं कि मैं भरोसा दिला सकता हूं कि टेनिस में इस तरह के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जाएगा.