आपको अच्छी नींद नहीं आती और रात में सोते वक्त पैर पटकने की आदत है तो सावधान हो जाइए आप पार्किंसंस का शिकार हो सकते हैं। अध्ययन के मुताबिक, विशेषकर पुरुषों में यह संकेत पार्किंसंस रोग से जुड़े एक विकार का संकेत हो सकता है। आंखों को जल्दी-जल्दी मीचने की आदत अक्सर 50 से 70 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों को प्रभावित करता है और महिलाओं की तुलना में ऐसा पुरुषों में अधिक पाया जाता है। यह नींद आने में दिक्कत के कारण होती है।
आरबीडी से पीड़ित लोग अपने सपनों में जीवित रहते हैं और नींद के दौरान हाथ-पैर चलाते रहते हैं और चिल्लाते हैं।
एक रिपोर्ट से पता चला है कि आरबीडी वाले पुरुषों में डोपामाइन की कमी होती है। डोपामाइन ब्रेन में एक केमिकल है, जो भावनाओं, गतिविधियों, खुशी और दर्द की उत्तेजनाओं को प्रभावित करता है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ पार्किंसंस रोग के विकसित होने का जोखिम बढ़ता चला जाता है। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं का समूह जो डोपमाइन को बनाता है, काम करना बंद कर देता है, जिस कारण पार्किंसंस रोग होता है।
पार्किंसंस रोग को हिंदी में कम्पाघात कहते है| यह एक मानसिक विकार है जो केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ रोग है| इस रोग की खोज सन 1817 में पार्किन्सन द्वारा की गई थी, इसिलिय इसे पार्किंसंस रोग कहते है। यह धीरे–धीरे बढ़ने वाला रोग है , जिसका शुरुआत में पता नहीं चलता।
जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो वह दैनिक दिनचर्या भी ठीक ढंग से करने में अक्षम हो जाता है क्योंकि इस रोग में रोगी व्यक्ति का शरीर कंप–कंपता रहता है। व्यक्ति का पूरा शरीर कांपता रहता है। ये लक्षण आम तौर पर दिखाई नहीं देते , लेकिन जब रोगी कोई कार्य करता है तो उसके हाथ या पैर कांपने लगते है। वैसे अगर रोग तीव्र अवस्था में है तो आसानी से व्यक्ति को पहचाना जा सकता है। पार्किंसंस रोगव्यक्ति की अंतिम अवस्था में दिखाई पड़ती है अर्थात बुढ़ापे में इस रोग के होने की आशंका अधिक होती है। रोग उत्पन्न होने के बाद यह रोगी को अक्षम करने वाला होता है।