राज्य में होने वाली आपराधिक घटनाओं (Criminal Cases) के कारण बिहार (Bihar) हमेशा से चर्चा में रहता है लेकिन हम आज आपको बता रहे हैं सूबे के एक ऐसे गांव की कहानी जो पूरी तरह से अपराध (Crime Free) मुक्त है. इस गांव (Village) में 700 लोग रहते हैं लेकिन आपसी भाईचारा (Harmony) ऐसी की किसी को आज तक थाने (Police Station) का मुंह तक नहीं देखना पड़ा.

न थाना जाने की जरूरत न कोर्ट की नौबत

कैमूर जिले के इस गांव के लोग न तो थाना जाते हैं और न ही किसी कार्ट या कचहरी में. यही नहीं इस गांव में रहने वाले 700 लोगों में से किसी भी व्यक्ति पर कोई केस नहीं है ना. कैमूर जिले के सरेयां गांव की पहचान आज आदर्श ग्राम के तौर पर बोती है. सरेया गांव कैमूर के मोहनियां थाना में पड़ता है. इस गांव में 65 घर है जिसमें 700 लोग रहते हैं और सभी एक दूसरे को परिवार ही मानते हैं.

गांव में ही सुलझ जाता है विवाद

कभी विवाद से जुड़ा कोई मामला होता है तो गांव में ही पंचायत लगाकर दोनों पक्षों का समझौता करा दिया जाता है. गांव की इस खासियत को देखकर ही कैमूर के डीएम अरविंद सिंह ने गांव को आदर्श ग्राम घोषित किया था. गांव के ही प्रखंड उप-प्रमुख कहते है कि हमें गर्व होता है कि हम इस गांव के रहने वाले के साथ ही जनप्रतिनिधी भी हैं. हम चाहते भी हैं कि मेरे गांव के लोगों की तरह ही और भी लोग रहें और बिहार भी अपराधमुक्त रहे.

महिलाएं भी खुश
गांव की महिला मंजू देवी बताती हैं कि मेरे गांव में कोई केस नहीं है. गांव में कभी कोई विवाद या ऐसा मामला होता है तो घर के लोग ही इसे आपस में सुलझा लेते हैं. मेरा गांव अपराध मुक्त है और यहां पूर्व से भी कोई मामला नहीं है. गांव में कभी पुलिस आई भी नहीं और न ही गांव के किसी शख्स को कोर्ट कचहरी जाना पड़ा.

गांव के लोगों को है गर्व
मोहनियां प्रखंड के उपप्रमुख और गांव निवासी प्रमोद सिंह बताते है कि हमें गर्व होता है कि हम इस गांव के रहने वाले हैं. गांव के लोगों की अपील है कि बिहार के लोग भी अपराध और केस-मुकदमे से दूर रहें और राज्य के विकास में भागीदार बनें.