इस्लामाबाद । कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने ही पाले तालिबान से भी झटका मिला है। तालिबान ने अफगानिस्तान और कश्मीर मुद्दे को जोडऩे का विरोध किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे को कुछ पक्षों की ओर से अफगानिस्तान से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। इससे संकट से निपटने में कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि अफगानिस्तान के मुद्दे का इससे कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा अफगानिस्तान अन्य देशों की प्रतिस्पर्धा के बीच फंसना नहीं चाहता।  अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल न करे। करजई ने कहा, 'अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया को कश्मीर में अपने उद्देश्य से जोडऩा, यह बताता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान को महज एक रणनीतिक उपकरण के तौर पर देखता है। मैं पाकिस्तान सरकार से कहना चाहता हूं कि वह क्षेत्र में हिंसा को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद करे। हम उम्मीद करते हैं कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार का फैसला राज्य और भारत के लोगों की बेहतरी वाला साबित होगा।  उधर, अमेरिका ने कहा कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही उसने दोनों देशों से शांति व संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से झटका मिलने के बाद पाकिस्तान विश्व समुदाय में अलग पड़ता जा रहा है। 
यूएन ने पाक को दिलाई शिमला समझौते की याद
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान में बढ़ती तलखी के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने दोनों देशों से इस मुद्दे पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। साथ ही गुटारेस ने पाकिस्तान को नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच 1972 में हुई शिमला समझौते की याद दिलाई, जिसमें कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया गया है।