खान-पान में बदलाव के कारण आजकल (हाइपरटेंशन) हाई ब्लड प्रेशर की बिमारी आम हो गयी है और डॉक्टर इसमें दवाइयों के जरिये नियंत्रण का प्रयास करते हैं। इन दवाओं से मरीजों को कई बार कब्ज की समस्या होत है। हाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार ब्लड प्रेशर) की कुछ दवाइयों से कब्ज की समस्या बेहद गंभीर रुप ले लेती है। यहां तक की मरीज को अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ता है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार कैल्शियम चैनल ब्लॉकर नाम के एक ड्रेग की वजह से डायवर्टीक्युलॉसिस हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पाचन नली की दीवारों पर छोटे-छोटे पाउच बन जाते हैं, जिन्हें डायवर्टीकुला कहा जाता है। अगर ये पाउच फट जाएं या फिर इनमें संक्रमण हो जाए तो स्थिति वाकई खतरनाक हो सकती है। यह कैल्शियम ब्लॉकर कैल्शियम की आपू्र्ति को बाधित कर ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। 
ऐसे में जरूरी है कि लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए। हाइपरटेंशन कई कारणों से होता है, जिनमें से कुछ कारण शारीरिक और कुछ मानसिक होते हैं। हाइपरटेंशन होने पर हार्ट, किडनी व शरीर के अन्य अंग काम करना बंद कर सकते हैं। इसके अलावा हाई बीपी के कारण आंखों पर भी असर पड़ता है। हाइपरटेंशन में रक्तचाप 140 के पार पहुंच जाता है। इसलिए इस बीमारी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए नहीं तो यह जानलेवा साबित हो सकती है।
हाइपरटेंशन से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली का पालन करने की जरूरत है। साथ ही हेल्दी डायट लें। शोधकर्ताओं के अनुसार, हाइपरटेंशन की समस्या को इन दो चीजों के अलावा कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एसीई-इन्हीबिटर्स या फिर बीटा ब्लॉकर्स की मदद से आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
तीन प्रकार की दवाएं नुकसानदेह 
शोधकर्ताओं ने हाइपरटेंशन के तीन प्रकार के ड्रग्स का मूल्यांकन किया और देखा कि हाइपरटेंशन के इलाज में ये कितने प्रभावी हैं और किस ड्रग के क्या नुकसान हैं। इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं मे अनुवांशिक विश्लेषण किया। यानी उन्होंने उन जीन्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया जो हाई ब्लड प्रेशर की विभिन्न दवाओं की नकल करते हैं। इस मूल्यांकन से शोधकर्ताओं को गैर डिहाइड्रोपीरीडीन कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स के बारे में पता चला जो डायवर्टीक्युलॉसिस नाम की कब्ज संबंधी समस्या को जन्म दे सकती है।