सभी मंदिरों में दर्शन के लिए आये श्रद्धालुओं के परिक्रमा करने की बातें आम हैं। मान्यता है कि इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करने से सारी सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है और मन को शांति मिलती है।  साथ ही यह भी मान्यता है कि नंगे पांव परिक्रमा करने से अधिक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। वहीं, धार्मिक मान्यता के अनुसार जब गणेश और कार्तिक के बीच संसार का चक्कर लगाने की प्रतिस्पर्धा चल रही थी तब गणेश जी ने अपनी चतुराई से पिता शिव और माता पार्वती के तीन चक्कर लगाए थे। इसी वजह से लोग भी पूजा के बाद संसार के निर्माता के चक्कर लगाते हैं। उनके अनुसार ऐसा करने से धन-समृद्धि होती हैं और जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। परिक्रमा करने की सही दिशा के विषय में माना गया है कि हमेशा परिक्रमा करते वक्त भगवान दाएं हाथ की तरफ होने चाहिए। यानी परिक्रमा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। यह भी माना जाता है कि परिक्रमा 8 से 9 बार करनी चाहिए।