लंदन ।जानलेवा ओवेरियन कैंसर महिलाओं में होने वाला यह दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है। इस कैंसर का आखिरी स्टेज तक भी लक्षणों का पता नहीं चल पाता और जब लक्षण नजर आते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ओवेरियन कैंसर को 'साइलंट किलर' भी कहा जाता है। लेकिन स्वीडन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ब्लड टेस्ट का विकास किया है जो ओवेरियन कैंसर को डिटेक्ट करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस टेस्ट के जरिए हजारों जानें बचाने में मदद मिलेगी। जिन महिलाओं की ओवरी में सिस्ट होती है या ब्लॉटिंग की समस्या होती है, उनका अल्ट्रासाउंड करके ओवेरियन कैंसर के लक्षण पता करने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में तो कैंसर का पुख्ता प्रमाण पाने के लिए सर्जरी तक करनी पड़ती है। लेकिन स्वीडिश वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए ब्लड टेस्ट के जरिए अब ओवेरियन कैंसर का वक्त पर पता लगाना आसान होगा। यह टेस्ट खून में मौजूद 11 प्रोटीन का विश्लेषण करता है। यह टेस्ट उन महिलाओं का पहचान करने में भी मदद करेगा, जिनमें अल्ट्रासाउंड स्कैन के दौरान शरीर में असामान्यताएं मिलती हैं। इस ब्लड टेस्ट के आने के बाद अब ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं है। यानी इस टेस्ट के जरिए ऑपरेशन दर में कटौती भी होगी। यूनिवर्सिटी ऑफ गुटेनबर्ग के प्रफेसर करिन ने कहा, 'एक कैंसर का पता लगाने के लिए हमें 5 महिलाओं तक का ऑपरेशन या सर्जरी करनी पड़ती है। जब अल्ट्रासाउंड स्कैन द्वारा शरीर में असामान्यताओं का पता चलता है और कैंसर होने का संदेह होता है तो उस स्थिति में वर्तमान में यही (ऑपरेशन) सबसे सही विकल्प है। लेकिन अब एक ऐसे ब्लड टेस्ट की वाकई जरूरत है जो उन महिलाओं का पता लगा सके, जिन्हें सर्जरी की जरूरत नहीं है।' प्रफेसर उल्फ गायलिनस्टेन के अनुसार, 'ओवेरियन कैंसर की शुरुआती जांच के लिए स्क्रीनिंग पर विचार करने के लिए हमारे परिणाम काफी आशाजनक हैं। इस कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए एक नई रणनीति विकसित करने की जरूरत है, जिसकी मदद से कई जानें बचाई जा सकेंगी और ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए सर्जरी करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।'